नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दिल्ली सरकार राजधानी में बीयर पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र को 25 साल से घटाकर 21 साल करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे NCR के पड़ोसी शहरों में पहले से ही बीयर पीने की कानूनी उम्र 21 साल है। ऐसे में दिल्ली में भी यही आयु सीमा लागू करने से अवैध शराब बिक्री और ब्लैक मार्केट पर प्रभावी लगाम लगाई जा सकती है। इस बैठक में शराब बिक्री को लेकर ‘हाइब्रिड मॉडल’ अपनाने पर भी विचार किया गया, जिसमें सरकारी वेंडरों के साथ-साथ निजी भागीदारी की अनुमति दी जा सकती है।
गौरतलब है कि फिलहाल दिल्ली में सिर्फ चार सरकारी निगम ही शराब की दुकानें संचालित कर रहे हैं। वर्ष 2022 में नई आबकारी नीति को लेकर उठे विवादों और CBI-ED की जांच के चलते सरकार ने निजी रिटेलर्स को हटाकर पुरानी नीति को फिर से लागू कर दिया था।
दिल्ली की नई शराब नीति पर काम शुरू, बड़े बदलावों की तैयारी
दिल्ली में नई आबकारी नीति (Excise Policy) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलावों पर विचार किया जा रहा है। नई नीति को लेकर हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने की। इस बैठक में शराब उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों की भागीदारी रही। बैठक में उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद, और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
राजस्व नुकसान बचाने की तैयारी, प्रीमियम ब्रांड्स पर फोकस
नई शराब नीति को लेकर कमेटी इस बात पर खास ध्यान दे रही है कि दिल्ली में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम ब्रांड्स की सहज उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इन ब्रांड्स की सीमित उपलब्धता के चलते उपभोक्ता अक्सर हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों का रुख करते हैं, जिससे दिल्ली सरकार को राजस्व का सीधा नुकसान होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित नीति का उद्देश्य ऐसी संरचना तैयार करना है जिससे दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के शराब के दामों में अंतर का फायदा उठाकर होने वाला राजस्व घाटा रोका जा सके। सरकार का लक्ष्य न सिर्फ उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प देना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था को शराब बाजार से मिलने वाले राजस्व में किसी तरह की गिरावट न आए।
रिहायशी इलाकों से हटेंगी शराब की दुकानें, मॉल-कॉमर्शियल एरिया में शिफ्ट करने की तैयारी
नई शराब नीति के तहत आबकारी विभाग घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों में मौजूद शराब की दुकानों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव है कि इन दुकानों को मॉल्स और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित किया जाए ताकि सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को कम किया जा सके। फिलहाल, राजधानी में शराब बिक्री का जिम्मा चार सरकारी कंपनियों के पास है और हर बोतल पर फिक्स्ड 50 रुपये का मार्जिन तय किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा सिस्टम पारदर्शिता तो लाता है, लेकिन इससे ग्राहक अनुभव और विकल्पों की विविधता सीमित हो जाती है। नई नीति में सरकार चाहती है कि प्रीमियम ब्रांड्स की आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और उपभोक्ताओं को बेहतर रिटेल अनुभव और अधिक विकल्प मिलें।





