नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली में लाल किले के पास हुए भयानक कार बम धमाके के बाद जांच हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक फैल चुकी है। जहां फॉरेंसिक टीम विस्फोटक की डिजाइन और बातचीत डेटा की जांच कर रही है, जबकि इंटेलिजेंस एजेंसियां संभावित स्थानीय सहायता नेटवर्क और फंडिंग रूट्स ट्रैक कर रही हैं।
दिल्ली धमाका: 13 की मौत, 20 से अधिक घायल
राजधानी के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए कार बम धमाके ने पूरे देश को दहलाकर रख दिया। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। यह धमाका न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन गया। वहीं इस धमाके के बाद हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर संदेह बढ़ गया। यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद केंद्र सरकार ने इसे गंभीर मामला मानते हुए यूनिवर्सिटी की फंडिंग स्रोत और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच के आदेश जारी किए हैं।
यूनिवर्सिटी और संदिग्ध डॉक्टरों का कनेक्शन
एनडीटीवी के सूत्रों के हवाले से पता चला है कि सरकार ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को मिली फंडिंग की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने का आदेश दिया है। जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी इस मामले में गिरफ्तार संदिग्धों के बीच अहम कड़ी बनकर उभरी। इस संस्थान में कथित तौर पर लाल किले धमाके की साजिश रची गई थी। जांच में कम से कम चार डॉक्टरों का धमाके से प्रत्यक्ष संबंध पाया गया है।
डॉ. मुजम्मिल गनई
डॉ. अदील अहमद राथर
डॉ. शाहीन सईद
डॉ. उमर नबी
26 लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि जुटाने का मामला
जांच का मुख्य फोकस यूनिवर्सिटी की फंडिंग पर है। इतनी बड़ी आतंकी साजिश उजागर होने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या विश्वविद्यालय का कैंपस कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए कवर के रूप में इस्तेमाल किया गया।जांच एजेंसियों को शक है कि यह राशि विदेशी स्रोतों से ट्रांसफर हुई हो सकती है, जो कथित तौर पर शैक्षणिक नेटवर्क के माध्यम से जुटाई गई।
सूत्रों के मुताबिक, सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के सिलसिले में गिरफ्तार डॉक्टरों ने लाल किले धमाके में इस्तेमाल की गई सामग्री खरीदने के लिए 26 लाख रुपये से अधिक की रकम जुटाई। एक अधिकारी ने बताया कि चार संदिग्ध डॉक्टरों ने मिलकर नकद राशि जमा की थी और इसे सुरक्षित रखने और ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए डॉ. उमर को सौंप दिया गया था। डॉ. उमर नबी, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के निवासी और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं, धमाके वाली आई20 कार चला रहे थे।
धनराशि का इस्तेमाल और IED निर्माण
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह धनराशि एक बड़ी आतंकी साजिश के लिए जुटाई गई थी। इस राशि से गुरुग्राम, नूंह और आसपास के शहरों से लगभग 3 लाख रुपये मूल्य का 26 क्विंटल एनपीके उर्वरक खरीदा गया। अधिकारियों ने बताया कि अन्य रसायनों के साथ मिश्रित इस उर्वरक का इस्तेमाल आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने में किया जाता है।
जांच में मिली अहम सुराग
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक की खरीद जांच में अहम सुराग बन गई। वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति रिकॉर्ड की पड़ताल जारी है। सूत्रों ने यह भी बताया कि विस्फोट से पहले डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच धन के लेन-देन को लेकर मतभेद हुआ था। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस विवाद का असर समूह की योजनाओं या हमले के समय पर पड़ा।
दिल्ली धमाके के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब केवल एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा जांच का केंद्र बन गई है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियां विश्वविद्यालय की फंडिंग, विदेशी सहयोग और वित्तीय नेटवर्क की गहन जाँच कर रही हैं। इस जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या किसी शैक्षणिक संस्था को आतंकवाद की गतिविधियों के लिए आड़ के रूप में इस्तेमाल किया गया।





