नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री जब्त की है। यह सफलता कश्मीरी डॉक्टर आदिल अहमद राठर की गिरफ्तारी और उससे हुई पूछताछ के बाद मिली, जिसके तार आतंकवादी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस ने आदिल राठर के ठिकाने से 350 किलोग्राम विस्फोटक, 2 AK-47 राइफलें और भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया। अधिकारियों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में घाटी और NCR से हुई सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है।
कौन हैं डॉक्टर आदिल अहमद राठर?
अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर का मूल निवासी है। जो पेशे से मेडिसिन विशेषज्ञ है। जिसकी तैनाती सहारनपुर, अंबाला रोड के एक प्राइवेट अस्पताल में है।
इनका निजी जीवन ऐसा है कि, इन्होनें पिछले महीने ही सहारनपुर की एक महिला डॉक्टर से निकाह किया है।
चौंकाने वाले खुलासे और AGH कनेक्शन
जांच में सामने आया है कि आदिल राठर ने अपने पेशे की आड़ में आतंकी साजिश रची थी आदिल ने फरीदाबाद में एक अलग कमरा किराये पर लिया था, जहां 350 किलो विस्फोटक और AK-47 छिपाए गए थे। दो दिन पहले, GMC में आदिल राठर के निजी लॉकर से एक AK-47 और अन्य गोला-बारूद बरामद किया गया। तीन डॉक्टर AGH से जुड़े: जांच में पता चला कि कुल तीन डॉक्टर इस आतंकी संगठन से जुड़े हैं।
गिरफ्तारी
आदिल अहमद राठर – फरीदाबाद
मुजम्मिल शकील – सहारनपुर
तीसरे डॉक्टर की तलाश अभी जारी है।
आदिल राठर का नाम उस मामले से जुड़ा है, जिसमें श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। 28 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई थी।सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और पुलिस प्रशासन की सख्त निगरानी जारी।जम्मू-कश्मीर के कई डॉक्टरों पर अब सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर है। अधिकारियों के अनुसार, बरामदगी की संवेदनशीलता को देखते हुए केस को जल्द ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हवाले किया जा सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डॉक्टर आदिल अहमद राठर की गिरफ्तारी और फरीदाबाद से भारी विस्फोटक बरामदगी ने एक बार फिर आतंकवादी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) को सुर्खियों में ला दिया है। बता दे कि, AGH एक कुख्यात जिहादी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और व्यापक भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी गतिविधियों और उपस्थिति को बढ़ाना है।
AGH की उत्पत्ति और विचारधारा
गठन 2017 में ज़ाकिर मूसा ने हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर इसे स्थापित किया। उद्देश्य था कश्मीर में शरिया कानून लागू करना। AGH को अल-कायदा (Al-Qaeda) का सहयोगी संगठन माना जाता है। इसका लक्ष्य कश्मीर के संघर्ष को वैश्विक जिहादी आंदोलन से जोड़ना, भारत में जिहाद फैलाना और ‘गजवा-ए-हिंद’ की अवधारणा को साकार करना।
AGH की रणनीति और गतिविधियाँ
AGH की रणनीति स्थानीय युवाओं और उच्च शिक्षित पेशेवरों को संगठन में शामिल करना है। आदिल राठर के मामले से स्पष्ट हुआ कि डॉक्टर जैसे पेशेवर भी इस नेटवर्क में भर्ती हो सकते हैं।
प्रचार और रिक्रूटमेंट
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार, विशेषकर युवाओं को प्रभावित करना। इस संगठन ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है।
डॉक्टरों की भूमिका
उच्च शिक्षित पेशेवरों का जुड़ना AGH के लिए बड़ी चुनौती है। ये लोग समाज में विश्वसनीयता की आड़ में रहकर विस्फोटक सामग्री छिपाने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद कर सकते हैं। फरीदाबाद और NCR से हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी यह संकेत देती है कि AGH का नेटवर्क अब कश्मीर के बाहर भी फैल चुका है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब इस मामले की गहराई से जांच करेगी। उद्देश्य है पता लगाना कि आदिल राठर और उसके सहयोगी इतने बड़े विस्फोटक भंडार का उपयोग कहाँ और किस साजिश के लिए करने वाले थे।
डॉक्टर आदिल राठर जैसे पेशेवरों का आतंकी नेटवर्क से जुड़ना न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती है, बल्कि यह दिखाता है कि AGH अब भारतीय उपमहाद्वीप में अपने कट्टरपंथी नेटवर्क और हमले की योजना को और भी व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है।





