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Monday, March 2, 2026
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सदन में शराब की डिलीवरी वाले बयान से बिहार में सियासी भूचाल, RJD विधायक पर JDU-BJP का करारा हमला

आरजेडी विधायक सुनील सिंह के शराब की लाइव डिलीवरी वाले बयान ने बिहार में सियासी तनाव बढ़ा दिया है, जबकि जेडीयू और बीजेपी ने इसे कानून तोड़ने की कोशिश बताते हुए कड़ा पलटवार किया है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। आरजेडी विधायक सुनील सिंह के उस बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वे 27 फरवरी को सदन परिसर में शराब की लाइव डिलीवरी करवा सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है।

”कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा”

सुनील सिंह के इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार सरकार में मंत्री मोहम्मद ज़मा खान ने इसे बिहार की छवि खराब करने वाला बयान करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी के कहने भर से कानून नहीं बदलता और अगर कोई शराबबंदी कानून का उल्लंघन करेगा तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। उनका कहना था कि राज्य में सुशासन कायम है और कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

”प्रशासन पूरी तरह तैयार है”

वहीं मंत्री लक्षेंद्र पासवान ने भी पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि क्या सुनील सिंह को शराब तस्करी नेटवर्क की जानकारी है या वे जानबूझकर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं? उन्होंने कहा कि शराब बेचने, उपलब्ध कराने या सेवन करने वालों के लिए जेल तय है। यदि कोई विधायक सदन परिसर में ऐसी चुनौती देता है तो प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

हताशा और राजनीतिक बयानबाजी

जेडीयू विधायक Shyam Rajak ने भी बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि शराबबंदी कानून लागू है और इसका उल्लंघन करने वालों को जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने इसे विपक्ष की हताशा और राजनीतिक बयानबाजी बताया।

साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है

गौरतलब है कि बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने सामाजिक सुधार के कदम के रूप में पेश किया था। हालांकि समय-समय पर अवैध शराब की बरामदगी और तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनको लेकर विपक्ष सरकार को घेरता रहा है।

27 फरवरी की तारीख को लेकर प्रशासन भी सतर्क

अब सुनील सिंह के बयान ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सत्ता पक्ष इसे कानून और राज्य की प्रतिष्ठा पर हमला बता रहा है, जबकि विपक्ष शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा रहा है। 27 फरवरी की तारीख को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है, क्योंकि यह बयान अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की परीक्षा का विषय बन गया है।

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