नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा जातिगत व्यवस्था समाप्त करने की अपील के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बयान के एक दिन बाद ही मंगलवार को जनअधिकार पार्टी (JAP) के सांसद पप्पू यादव ने ताबड़तोड़ हमला बोला है । जहां उन्होंने कहा, रामभद्राचार्य कौन हैं, हम नहीं जानते। ये अंधा, काना, बहरा, गूंगा ऐसे लोगों का इलाज सिर्फ अंबेडकरवादी विचारों में है। बाबा साहब पहले ही कह चुके हैं कि हम वसुधैव कुटुम्बकम वाले लोग हैं, संकीर्ण धार्मिक सोच वाले नहीं।
बीजेपी ने किया समर्थन, कांग्रेस ने PM-CM से जवाब मांग
रामभद्राचार्य के बयान का समर्थन करते हुए बीजेपी मंत्री लखेंद्र कुमार बोले कि जातिगत विभाजन राष्ट्र को कमजोर करता है। उनके इस रुख पर कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने पलटवार कर कहा,सबसे पहले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि वे ऐसे बयानों के साथ हैं या नहीं। आरक्षण और SC-ST एक्ट संविधान ने दिया है, इसे खत्म करने की कोशिश करेगा, वह खुद खत्म हो जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे बयानों से RSS और बीजेपी की मंशा साफ दिखाई देती है।
जेडीयू ने दी कड़ी प्रतिक्रिया: ‘आरक्षण को छू भी नहीं सकते’
विवाद बढ़ने पर जेडीयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद ने बीजेपी के बयान से दूरी बनाते हुए कहा, कौन क्या कहता है, उससे हमें मतलब नहीं। आरक्षण को कोई छू नहीं सकता। यह देश संविधान और बाबा साहब के रास्ते पर चलेगा।आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि, ये दलितों, अति पिछड़ों और वंचितों पर अत्याचार करना चाहते हैं। SC-ST एक्ट की वजह से अत्याचार कम हुए हैं। इनके बयान बताने के लिए काफी हैं कि RSS-BJP की सोच क्या है।
रामभद्राचार्य के बयान से शुरू हुआ विवाद अब जाति, आरक्षण और संविधान की बहस में बदल चुका है। बिहार की राजनीति फिर एक बार उसी पुराने केंद्रदलित, पिछड़ा, आरक्षण और सामाजिक न्यायपर सिमट आई है। रामभद्राचार्य जी ने अपने सार्वजनिक संबोधन में जातिगत व्यवस्था को लेकर जो मुख्य अपील की, वह निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित थी।
उन्होंने समाज को विभाजित करने वाली जातिगत व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने का आह्वान किया। उनका मानना है कि राष्ट्र की मजबूती और सामाजिक एकता के लिए यह विभाजनकारी व्यवस्था खत्म होनी चाहिए।उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी नागरिकों को धर्म और जाति से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि,जब तक समाज में जाति के नाम पर विभाजन रहेगा, तब तक राष्ट्र पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने जातिगत मतभेदों को भुलाकर राष्ट्रहित में एकजुट होने का संदेश दिया।
हालांकि, उनका बयान सामाजिक समरसता के आह्वान के रूप में था, लेकिन ‘जातिगत व्यवस्था समाप्त करने’ की अपील को बिहार के राजनीतिक दलों (आरजेडी, कांग्रेस, जेडीयू) ने सीधे तौर पर ‘आरक्षण समाप्त करने’ की साज़िश के रूप में देखा।
यही कारण है कि पप्पू यादव जैसे नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी, क्योंकि उनके अनुसार, जातिगत विभाजन का समाधान आरक्षण को समाप्त करना नहीं है, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक न्याय को मजबूत करना है, जैसा कि बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों में निहित है।
इस बयान के माध्यम से पप्पू यादव ने यह स्थापित करने की कोशिश की कि बाबासाहेब का संघर्ष केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक संवैधानिक और समतावादी समाज की स्थापना के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य का बयान, भले ही ‘जाति खत्म’ करने की अपील हो, लेकिन यह एक संकीर्ण धार्मिक सोच से प्रेरित है जो संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक सुरक्षा (आरक्षण) को नज़रअंदाज़ करती है।





