Political Kissa: देश की राजनीति में एक समय ऐसा भी, जब किसानों के चंदे से जलता था पार्टी कार्यालय का चूल्हा

Political Kissa: इस बीच पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान ने एक पुराना चुनावी किस्सा साझा किया। यह किस्सा चुनावी प्रचार से जुड़ा हुआ है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश में चुनावी माहौल है। देश के 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटों में लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इस बीच पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान ने एक पुराना चुनावी किस्सा साझा किया। यह किस्सा चुनावी प्रचार से जुड़ा हुआ है।

एक आम आदमी निर्दलीय चुनाव लड़ने के बारे में भी हजार बार सोचेगा

आज के समय में जहां राजनीतिक पार्टियां लाखों करोड़ो रुपये अपने अपने चुनावी प्रचार में खर्च कर देते हैं। इसको लेकर एक आम आदमी निर्दलीय चुनाव लड़ने के बारे में भी हजार बार सोचेगा। आज के समय में अपने चुनावी मुद्दों को जनता के सामने रखने के लिए लाखो रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान के अनुसार पहले ऐसा नहीं होता था।

किसानों से चंदा इकट्ठा करके बिना किसी परेशानी के चुनाव लड़ा जाता था

पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान के अनुसार पहले चुनाव लड़ने के लिए आज की तरह चंदे के लिए इतना मारा मारी नहीं हुआ करती थी। बल्कि किसानों से चंदा इकट्ठा करके बिना किसी परेशानी के चुनाव लड़ा जाता था। आज के समय में जहां चुनावी चंदा को लेकर काफी विवाद हो रहा है। वहीं पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान का कहना है कि उन्होंने सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र से 12 बार चुनाव लड़ा और आठ बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने पहली बार चुनाव में वर्ष 1969 में जीत दर्ज की थी। पूर्व मंत्री ने बताया कि 1977, 1990, 1995 और 2000 में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा था। पूर्व मंत्री ने कहा कि उनको अपने 12 चुनावों में से किसी भी चुनाव में अपना एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। उन्होंने उस समय की सबसे रोचक बात बताई कि चुनाव के बाद उल्टा दाल चावल बच जाया करता था।

नेता और कार्यकर्ता में समर्पण का भाव होता था

पूर्व मंत्री का कहना है कि उस दौर में कार्यकर्ता जनता के बीच एक महत्वपूर्व कड़ी के रूप में कार्य करता था। उस समय फालतू का खर्चा नहीं हुआ करता था। नेता और कार्यकर्ता में समर्पण का भाव होता था। उस समय गाड़ी और प्रचार तंत्र का ऐसा कोई झंझट नहीं हुआ करता था।

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