किसी भाषा को किसी धर्म अथवा संप्रदाय के प्रतिनिधि मात्र रूप में देखे जाने के बदले अभिव्यक्ति का साधन मानकर उसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयास करने की अपील की।