नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । नीतीश कुमार की नई सरकार में जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि अगले महीने मंत्रिपरिषद का विस्तार होने जा रहा है। एनडीए की सरकार बनने और विभागों के बंटवारे के बाद अब मंत्रियों की नई टीम तैयार की जा रही है। सबसे ज्यादा निगाहें इस बात पर हैं कि जेडीयू किस तरह जातीय संतुलन साधते हुए नए चेहरों को मौका देगी। जेडीयू में छह और बीजेपी में तीन पद खाली
फिलहाल मंत्रिमंडल में कुल नौ पद खाली हैं जिनमें जेडीयू के छह और बीजेपी के तीन पद शामिल हैं। संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसलिए इस विस्तार को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
कुशवाहा और अति पिछड़े समाज को मिल सकता है मौका
सूत्रों का कहना है कि जेडीयू खास तौर पर कुशवाहा समाज और अति पिछड़े वर्ग के विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देने की तैयारी में है। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते हैं और जेडीयू इस विस्तार के जरिए अपने परंपरागत सामाजिक आधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। जेडीयू के दिग्गज मंत्रियों बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास फिलहाल पांच विभाग हैं जबकि विजय चौधरी के पास चार और श्रवण कुमार तथा सुनील कुमार के पास दो-दो विभाग हैं। ऐसे में उम्मीद है कि नए मंत्रियों को इनमें से कुछ अहम विभाग भी सौंपे जा सकते हैं ताकि काम का बंटवारा संतुलित हो सके।
NDA के फॉर्मले के अनुसार पदों का बंटवारा
दूसरी ओर एनडीए के फार्मूले के अनुसार बीजेपी के हिस्से 17 और जेडीयू के हिस्से 15 मंत्री पद आते हैं जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। एलजेपी को दो और हम तथा आरएलपी को एक-एक पद मिला है। इस हिसाब से बीजेपी अभी तीन और जेडीयू छह और मंत्री बना सकती है। बीजेपी खेमे में भी कई चेहरे विभागों की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जैसे विजय सिंह, मंगल पांडेय, नितिन नबीन और अरुण शंकर प्रसाद। इसलिए भाजपा के नए मंत्रियों की सूची भी ध्यान खींचेगी।
इस बीच यह चर्चा भी चली कि जेडीयू अन्य दलों के विधायकों को तोड़कर अपनी संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि मंत्रिमंडल में उन्हें शामिल किया जा सके। हालांकि जेडीयू ने इन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि न तो इसकी जरूरत है और न ही इसकी कोई तैयारी चल रही है। राज्यसभा चुनाव में अभी छह महीने का समय है और मौजूदा आंकड़ों के आधार पर एनडीए पांचों सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है। ऐसे में दूसरे दलों के समर्थन की तत्काल कोई आवश्यकता नहीं है।
बिहार मंत्रिमंडल विस्तार पर बढ़ी राजनीतिक उत्सुकता
कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। जेडीयू के नए चेहरे कौन होंगे, भाजपा किन विधायकों को मौका देगी और विभागों का नया समीकरण कैसा होगा यह अगले महीने साफ होगा। यह विस्तार न सिर्फ नीतीश सरकार के कामकाज की दिशा तय करेगा बल्कि आने वाले महीनों की राजनीतिक तैयारी का आधार भी बनेगा।





