छात्र नेता से नीतीश कुमार ने कैसे तय किया बिहार के CM तक का सफर, यहां जानें उनकी पूरी राजनीतिक यात्रा

Bihar News: आज बिहार से जंगलराज हटाने वाले नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्मदिन है।
Nitish kumar
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज बिहार से जंगलराज हटाने वाले नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्मदिन है। वह 73 साल के हो गए हैं। बिहार के एक छोटे से गांव से लेकर प्रदेश की राजनीति के शीर्ष पद तक का उनका सफर बेहद ही रोचक रहा है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत एक छात्र नेता के रूप में शुरू की थी। नीतीश ने वर्ष 2005 में बिहार से जंगलराज हटाने का नारा दिया था। उस समय उनकी पार्टी ने 88 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उनका जीत का आकड़ा इतनी सीटों पर ही नहीं रुका। उनका बेहतर कार्य को देखते हुए प्रदेश की जनता ने उन्हें खुलकर वोट किया। जिसके परिमाणस्वरुप उनका आकड़ा 5 साल में बढ़कर 115 तक पहुंच गया था। उनके अच्छे कार्यों के कारण ही उनका नाम सुशासन बाबू पड़ा। तब से बिहार की राजनीति में उनका शानदार कार्य जारी है।

उन्होंने एक छात्र नेता से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है

बिहार के मौजूदा सीएम नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में हुआ था। उन्होंने राजनीति में आने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और बिहार राज्य विद्युत बोर्ड में भी कार्य किया था। उनका जयप्रकाश नारायण के जन अभियान में झुकाव होने कारण वे भी इस अभियान से जुड़ गए। यह आंदोलन कांग्रेस की इंदिरा सरकार के खिलाफ था। उन्होंने एक छात्र नेता से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है।

उस समय बिहार की राजनीति में लालू यादव और उनकी पत्नी का दबदबा हुआ करता था

नीतीश अपने जीवन में इन दो नेताओं का योगदान कभी नहीं भूलते हैं। उनका हमेशा सम्मान के साथ नाम लेते भी हैं और सच्चे दिल से सम्मान करते भी हैं। अटल बिहारी सरकार के समय ही नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने थे। उस समय बिहार की राजनीति में लालू यादव और उनकी पत्नी का दबदबा हुआ करता था। ऐसे में नीतीश कुमार का बिहार का सीएम बनना इतना आसान नही था। लेकिन जेटली और आडवानी ने JDU और बिहार भाजपा को मनाया और नीतीश कुमार को बिहार सीएम के लिए चुना था। नीतीश कुमार बिहार में 9 बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं।

उस समय नीतीश कुमार के द्वारा समाज को एक बड़ी सीख दी गयी थी

नीतीश कुमार का विवाह मंजू देवी के साथ 22 फरवरी 1973 को हुआ था। जो एक दहेज मुक्त शादी थी। बकायदा उनकी शादी के कार्ड में लिखा भी हुआ था कि ‘तिलक दहेज एवं शोषण युक्त कुप्रथाओं से मुक्त एक आदर्श विवाह। उनका विवाह पूरी सादगी के साथ हुआ था, उसमे किसी तरह के उपहार एक दुसरे को नहीं दिए गए थे। उस समय यह नीतीश कुमार के द्वारा समाज को एक बड़ी सीख दी गयी थी। जो कि वाक्य में बहुत ही सराहनीय कार्य था। हर किसी को इस नियम का पालन करना चाहिए।

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