नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर घमासान तेज होता जा रहा है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक जीतन राम मांझी की पार्टी भी इससे अछूती नहीं रही। गया जिले में पार्टी के भीतर बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी की ही एक जिला पार्षद ने जीतन राम मांझी की बहू के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। इससे पार्टी में अंदरूनी कलह और खुलकर सामने आ गई है।
मांझी की बहू के खिलाफ पार्वती देवी ने ठोकी ताल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) में अंदरूनी कलह गहराती जा रही है। गया जिले के इमामगंज प्रखंड की जिला पार्षद और हम पार्टी की नेता पार्वती देवी ने खुलकर बगावती तेवर अपना लिए हैं। इमामगंज सीट से वर्तमान विधायक दीपा मांझी, जो कि जीतन राम मांझी की बहू हैं, उनके खिलाफ पार्वती देवी ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्वती देवी ने इमामगंज से अपनी उम्मीदवारी की औपचारिक दावेदारी ठोक दी है।
उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी दी है कि अगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगी। पार्वती का कहना है कि दीपा मांझी के खिलाफ वे हर हाल में मैदान में उतरेंगी, चाहे इसके लिए पार्टी से बगावत ही क्यों न करनी पड़े। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि “पार्वती देवी को जिला परिषद में जो सफलता मिली है, वह हम पार्टी की नेता होने की वजह से मिली है।”
बगावत पर क्या बोले मंत्री संतोष सुमन?
पार्टी में चल रही बगावत और पार्वती देवी की दीपा मांझी के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री संतोष सुमन ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हर किसी की इच्छा का सम्मान होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है, तो वह किसी के भी खिलाफ चुनाव लड़ सकता है। जरूरी नहीं कि सभी लोग हमारे साथ हों।” संतोष सुमन ने आगे कहा, “अगर किसी को विधायक पसंद नहीं है, या किसी को पार्टी नहीं भा रही है, तो यह उनका व्यक्तिगत और स्वतंत्र विचार है। ऐसे मामलों में हमें किसी तरह की टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।” उनके इस बयान को पार्टी में व्याप्त असंतोष को शांति से संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।





