नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की भागवत कथा इन दिनों विवादों के केंद्र में है। इंडो-नेपाल बॉर्डर के पास स्थित रक्सौल हवाई अड्डा परिसर में 5 फरवरी से यह धार्मिक आयोजन हो रहा है। कथा के चौथे दिन पंडाल में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही महाराज मंच पर पहुंचे, प्रवेश द्वार पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और हालात काबू से बाहर होने पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
घटना के अगले दिन मंच से दिए गए संबोधन में अनिरुद्धाचार्य का स्वर काफी तीखा रहा। उन्होंने अव्यवस्था पर नाराजगी जताई और नगर परिषद द्वारा शौचालय हटाए जाने के मुद्दे पर भी कड़ी टिप्पणी की। साथ ही उन्होंने कहा कि “कथा आयोजन में किसी से धन नहीं लिया गया है..किसी के बाप का पैसा नहीं लगा, किसी से एक रुपया भी नहीं लिया गया है।” उनके इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष की चर्चा तेज हो गई।
नगर परिषद ने दी सफाई
रक्सौल में आयोजित भागवत कथा को लेकर उठे सवालों के बीच स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आयोजकों पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। नगर परिषद के प्रतिनिधियों का कहना है कि कार्यक्रम के प्रचार के लिए शहर भर में होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए थे। साथ ही सफाई कर्मियों की तैनाती और चलंत शौचालय की व्यवस्था भी की गई थी।
नगर परिषद के अनुसार संसाधन सीमित होने के बावजूद कर्मचारियों और मजदूरों को लगातार ड्यूटी पर लगाया गया। पहले दिन करीब 50 मजदूर तैनात किए गए, जबकि उसके बाद प्रतिदिन लगभग 25 कर्मी सफाई और व्यवस्था संभालते रहे। कथा स्थल पर तीन मोबाइल शौचालय उपलब्ध कराए गए थे। स्थानीय नेताओं और युवाओं ने यह भी दावा किया कि रक्सौल के अलावा नेपाल के बीरगंज क्षेत्र से भी चंदा और सहयोग एकत्र कर आयोजन में योगदान दिया गया। नगर परिषद ने बताया कि शहर में लगाए गए होर्डिंग और पोस्टरों का खर्च लगभग ढाई लाख रुपये आंका गया है। इस शुल्क को माफ करने के प्रस्ताव पर परिषद की बैठक में विचार किया जा सकता है।
अनिरुद्धाचार्य का तीखा बयान
लाठीचार्ज की खबरों को लेकर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने मंच से मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया गलत तस्वीर पेश कर रहा है। साथ ही नगर परिषद से सवाल उठाते हुए उन्होंने सार्वजनिक शौचालय व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणी की। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि कथा आयोजन में किसी से धन नहीं लिया गया है, किसी का बाप का एक रुपया नहीं लगा है, भागवत कथा आयोजन में किसी से एक रुपया नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम बिना आर्थिक योगदान के आयोजित किया गया है।
वहीं, रक्सौल नगर परिषद से जुड़े प्रतिनिधि दीपक गुप्ता ने कहा कि लगाए गए आरोपों की सच्चाई जानने के लिए स्थानीय स्तर पर बातचीत की जानी चाहिए। जदयू के युवा नेता सन्नी कुमार ने भी दावा किया कि कथा आयोजन के लिए रक्सौल शहर और नेपाल के बीरगंज क्षेत्र से सहयोग जुटाया गया। उनके अनुसार, कई लोग स्वयं आयोजन में सहयोग के लिए आगे आए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
सहयोग का दावा करने वाले युवक ने लगाए गंभीर आरोप
शहर के युवा सन्नी कुमार ने दावा किया कि उन्होंने आयोजनकर्ताओं के साथ मिलकर घर-घर जाकर कथा के लिए चंदा जुटाने में सहयोग किया। सन्नी कुमार का कहना है कि चौथे दिन जब वे पंडाल के पास कथा सुनने पहुंचे, तो उनसे राशि 1 एक लाख रुपए की मांग की गई और पहचान से इनकार करते हुए बाहर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस घटना से वे आहत हुए, हालांकि बाद में पीछे बैठकर कथा सुनी और लौट गए।
दूसरी ओर, कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए प्रशासन सतर्क है। मोतिहारी पुलिस ने क्यूआरटी टीम, स्कॉट वाहन और कई थानों की पुलिस बल को तैनात किया है। रक्सौल बॉर्डर पर तैनात एसएसबी 47वीं बटालियन ने भी अपने स्तर पर सहयोग दिया। कार्यक्रम में रक्सौल विधायक प्रमोद सिन्हा और पश्चिमी चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल भी शामिल हुए। यह धार्मिक आयोजन 5 फरवरी से 11 फरवरी तक रक्सौल हवाई अड्डा परिसर में स्थानीय लोगों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।





