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बक्सर का स्वास्थ्य महकमा भंवरजाल का शिकार, वह भी केन्द्रीय स्वास्थ्यमंत्री की लापरवाह करतूतों से

बक्सर , 19 मई (हि.स.)। बक्सर का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह भंवरजाल का शिकार है, जबकि बक्सर केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का अधिकार क्षेत्र है। ऐसा होने पर यह कयास था कि अब स्वास्थ्य सेवा को लेकर बक्सर के दिन बदलेंगे। पर इन जनप्रतिनिधियों की करतूतों ने सारे कयासों पर पानी फेरने का काम किया है। पहले एक ही एम्बुलेंस को चार अलग -अलग नामों से चार बार उदघाटन किया जाना और अब एक ही अस्पताल भवन का दो नामों से अलग—अलग शिलापट लगा कर दो बार उदघाटन किया जाना केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री के रूतबे से मेल नहीं खा रहा। बक्सर जिला मुख्यालय स्थित पुराने सदर अस्पताल भवन का पहली बार शहरी प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र के नाम से केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने 04 नवम्बर 2017 के दिन उदघाटन किया। इस उदघाटन समारोह में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इस बाबत कांग्रेस के सदर विधायक संजय तिवारी का कहना था कि 2015 में बनी महागठबंधन सरकार ने ही इस पुराने सदर अस्पताल को शहरी प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र के रूप में मान्यता दे दी थी। ऐसे में स्थानीय सांसद का कोई हक नहीं बनता कि इसका उदघाटन करें। इस बीच इस शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उदघाटन के आठ माह बीते भी नहीं थे कि पुनः इसी भवन का नाम हेल्थ वेलनेस सेंटर बदल कर 15 सितम्बर 2018 के दिन केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री द्वारा नये शिलापट के साथ दूसरी बार उदघाटन कर दिया गया।उदघाटन समारोह में इसे अपना क्रेडिट बताते हुए स्थानीय सांसद ने बताया था कि इस वेलनेस सेंटर पर कुल 76 प्रकार की जांच के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। साथ ही लाबाइक, मेडिसिन एटीएम, वाटर एटीएम,टेली मेडिसिन समेत प्रसूति महिलाओं के लिए विशेष ब्यवस्था उपलब्ध है। आश्चर्य तो यह है कि उदघाटन के दूसरे दिन ही 06 लबाइक कहां चली गई विभागीय अधिकारियों को भी पता नहीं। ना ही इसे स्थानीय स्वास्थ्य महकमे को ही कागजी तौर पर हेंडओवर किया गया। वेलनेस सेंटर के टेलीमेडिसिन और मेडिसिन एटीएम में उदघाटन के महज दो दिनों बाद से ही ताला लटका है जो अबतक बंद ही है। इस अस्पताल में उपस्थित चिकित्सक ने बताया कि टेलीमेडिसिन और मेडिसिन एटीएम के लिए जिसे नियुक्त किया गया था उसे दो सप्ताह के भीतर ही हटा दिया गया। अब वेलनेस सेंटर का आलम यह है कि फार्मासिस्ट के अभाव में एक्स-रे टेक्नीशियन से ही दवा वितरण का कोरम पूरा किया जा रहा । केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बेहतर काम करना चाह रही है। पर उसके मातहत मंत्री ही रास्ते का रोड़ा बने तो भगवान ही मालिक है। हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा

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