नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के सीएम पद की शपथ ले ली है। वो नौंवी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने आज सुबह ही अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा था। नीतीश के CM बनते ही राज्य में हफ्तेभर से चल रहा कन्फ्यूजन दूर हो गया है। अब तस्वीर साफ हो गई है कि नीतीश महागठबंधन से अलग हो गए हैं और उन्होंने एक बार फिर NDA का दामन पकड़ लिया है।
इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बात की। इस इस्तीफे का कारण उन्होंने जनता और पार्टी से जुड़े लोगों की राय को बताया है। उन्होंने कहा, “पहले गठबंधन को छोड़कर हमने नया गठबंधन बनाया था। यहां आकर स्थिति ठीक नहीं लग रही थी। इसलिए इस्तीफा दे दिया। हमारी मेहनत का क्रेडिट दूसरे लोग ले रहे थे।”
नीतीश का कभी इधर, कभी उधर
हाल के सालों में नीतीश कुमार ने इतनी बार अपना पाला बदला है कि राजनीतिक गलियारे में उन्हें ‘पलटू राम’ नाम से भी बुलाया जाता है। वो कभी लालू प्रसाद यादव की RJD की लालटेन पकड़ लेते हैं तो कभी NDA का दामन थाम लेते हैं। इधर-उधर और उधर-इधर का ये सिलसिला 90 के दशक से जारी है।
1990 में लालू को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार 1994 के आते-आते लालू से नाराज़ हो गए। 1995 में उन्होंने NDA से हाथ मिला लिया। ये साथ कई सालों तक बना रहा, पर 2012 में जब नरेंद्र मोदी का नाम NDA के बड़े नेता के रूप में उभरा तो NDA छोड़कर वो एक बार फिर RJD के पास आए। 2015 का चुनाव दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ा और जीता भी। पर 2017 में लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और नीतीश ने किनारा कर लिया। फिर NDA के पाले में गए। फिर 2020 का चुनाव उन्होंने NDA के साथ मिलकर लड़ा, फिर चुनाव जीता। लेकिन 2022 में फिर से 2017 वाला गेम किया। NDA को बाय बोलकर RJD से हाथ मिला लिया। इस महागठबंधन की सरकार 17 महीने चली और अब नीतीश फिर NDA के खेमे में आ गए हैं।
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