नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार के चुनावी मैदान में एक बार फिर राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी का बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सिद्दीकी ने हाल ही में कहा था कि हिन्दू भाइयों को सेकुलरिज्म, सोशलिज्म और संविधान को बेहतर समझने की जरूरत है वहीं अब इस बयान को बीजेपी ने सीधे हिन्दू समुदाय के खिलाफ बताकर कड़ी आलोचना की है।
जब बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए, तो सिद्दीकी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल एक संगठन हिन्दुओं को उन्मादी बनाने की कोशिश कर रहा है, जो समाज में हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई बढ़ाने का काम कर रहा है। सिद्दीकी ने साफ किया कि,उनका किसी धर्म या जाति के खिलाफ कोई इरादा नहीं है, बल्कि वे समाज में शांति और एकता चाहते हैं।
हिंदू समुदाय से अपील और सेकुलरिज्म का पाठ
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव के करीबी कहे जाने वाले अब्दुल बारी सिद्दीकी ने हिंदू समुदाय को सीधे संबोधित करते हुए कहा था कि, उन्हें सेकुलरिज्म और संविधान की गहरी समझ विकसित करनी होगी। उनका तर्क था कि सही समझ से ही सामाजिक एकता और शांति बनी रह सकती है। सिद्दीकी के इस बयान ने राजनीतिक गर्मा दी है, वहीं, राजनीति के जानकार कहते हैं कि सिद्दीकी का यह बयान आरजेडी की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
इस पर बीजेपी के नेता दानिश इकबाल ने तुरंत जवाब दिया,हिंदुओं ने हमेशा सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलने की संस्कृति बनाई है। उन्हें सेकुलरिज्म सिखाने की जरूरत नहीं। वहीं, बीजेपी के मंत्री संजय सरावगी ने तो इसे हिंदुओं को उपद्रवी बताने तक कह दिया। संजय सरावगी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, सिद्दीकी माफी मांगने की बजाय हिन्दुओं को उपद्रवी बता रहे हैं। उन्होंने कहा, जो दिल में होता है, वह जुबां पर आ जाता है। वे मुस्लिम समुदाय के नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम संविधान और भारत की एकता में विश्वास रखते हैं।
अब सवाल ये उठता है कि क्या बिहार का यह बयानबाजी वाला दौर विधानसभा चुनाव में जाति और धर्म के विवादों को और भड़काएगा, या फिर सबको जोड़ने का मौका देगा? बिहार के राजनीतिक माहौल में ऐसे बयान अक्सर चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिससे वोटरों की भावनाओं को भुनाया जाता है। अब देश की नजरें बिहार चुनाव पर टिकी हैं, जहां राजद और बीजेपी दोनों अपनी-अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में नेताओं के हर बयान पर कड़ी नजर रखी जा रही है।




