Ram Mandir के मुख्य यजमान को मानने होंगे ये 45 कठोर नियम, 'चौकी पर सोना, मौन रहना, एक टाइम खाना' होगा शामिल

Ram Mandir Inauguration: 22 जनवरी को 84 सेकंड के अभिजीत मुहूर्त में होने वाले समारोह के मुख्य यजमान एक दंपती होंगे। दंपती को 8 दिन के ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा।
Ram Mandir Inauguration
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। अयोध्या में 22 जनवरी को नए बने राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक परंपराओं और मान्यताओं के साथ होनी तय हुई है। 22 जनवरी को 84 सेकंड के अभिजीत मुहूर्त में होने वाले समारोह के मुख्य यजमान एक दंपती होंगे। दंपती को 8 दिन के ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। 15 जनवरी से ही उनको उपवास, जप, तप, हवन, स्नान और दान समेत 45 नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। फिलहाल प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य यजमान दंपती का नाम अभी समने नहीं आया है। लेकिन राम मंदिर के सूत्रों के मुताबिक, यजमान दंपति को 8 दिन ब्रह्मचर्य के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। 15 जनवरी से यह ब्रह्मचर्य जीवन शुरू होगा, जो 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के बाद खत्म होगा।

आठ दिनों तक सभी 45 नियमों का करना होगा पालन

आपको बता दें रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा के यजमान के लिए नियमों पर काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ से सलाह मांगी थी। जिस पर उन्होंने कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को एक पत्र लिख कर मुख्य यजमान को लेकर नियमों की जानकारी दी। पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ के भेजे गए पत्र में कहा है कि मुख्य यजमान को आठ दिनों तक सभी 45 नियमों का पालन करना होगा। इसमें प्रायश्चित, गोदान, दशविध स्नान, प्रायश्चित क्षौर और पंचगव्यप्राशन भी शामिल है। इन नियमों के अनुसार अपनी जीवनचर्या बदलनी होगी।

आइए जानते हैं कौन-से है ऐसे सख्त नियम

1. रोज नहाना होगा। नित्य प्रात: स्नान, बाहरी भोजन वर्जित, बीड़ी-सिगरेट का त्याग।

2. मन को विचलित करने वाले दृश्य पूरी तरह से वर्जित, खुद को शांत रखें, क्रोध न करें, अहंकार एवं मद से दूर रहना होगा, ब्राह्मणों को संतुष्ट रखना होगा।

3. सच बोलना होगा। सच बोलने में अड़चन होने पर मौन रहना होगा।

4. रोज ब्राह्मणों की सेवा करनी होगी। आचार्य, ब्राह्मण और ऋत्विजों से झगड़ा, कठोर वचन व कटु भाषण का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सद्विचार एवं सद्चिंतन करेंगे।

5. पुरुष यजमान सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहनेंगे। पत्नी लहंगा, चोली जैसे सिले वस्त्र पहन सकेंगी। स्वेटर, ऊनी शाल, कंबल धारण कर सकेंगे।

6. नित्य का पूजन होने के पूर्व यजमान फलाहार कर सकते हैं। गरम व शीतल शुद्ध जल ले सकते हैं। बोतलबंद पानी व बर्फ वर्जित है।

7. रात्रि में आरती के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं। रात्रि में सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

8. हल्दी, राई, सरसों, उड़द, मूली, बैंगन, लहसुन, प्याज, मंदिरा, मांस, अंडा, तेल से बने पदार्थ, गुड़, भुजिया चावल, चना वर्जित है।

9. औषधि व तांबूल ले सकते हैं। खाने-पीने की चीजें भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में ही ग्रहण करें।

10. दोपहर में ब्राह्मणों को पहले आहार पर बैठाना चाहिए, उसके बाद यजमान आहार करें। रात्रि में भी इसी तरह करना होगा।

11. दिन में शयन वर्जित है। शयन लकड़ी की चौकी पर करना होगा। खटिया पर बैठना, सोना वर्जित है।

12. पुरुष को दर्भासन एवं कंबल तथा महिला के लिए कंबल, संपूर्ण कार्य होने के पूर्व रोजाना बिछौना पर बैठना वर्जित। रोज दाढ़ी एवं नख निकालना वर्जित

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