Ram Mandir: जन्मस्थान पर विराजमान हुए रामलला, सपना पूरा देख उमा भारती से गले मिलते ही रो पड़ीं साध्‍वी ऋतंभरा

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरा हो चुका है। सपने को पूरा होते देख अपने आंसू नहीं रोक पाईं साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती।
साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती
साध्वी ऋतंभरा, उमा भारतीRaftaar

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लंबे संघर्ष और 500 साल का इंतज़ार आखिरकार खत्म हो गया और वो शुभ घड़ी आज समने आ ही गई है। जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। और अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थन पर विराजमान हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई। अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरा हो चुका है। रामलला अयोध्या में विराजमान हो गए हैं। मंदिर में विराजमान हुए रामलला का पहला वीडियो भी सामने आ गया है।

राम मंदिर निर्माण के पीछे कई लोगों का योगदान

आपको बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इतना सहज नहीं रहा है। राम मंदिर बनने के पीछे की कहानी बहुत ही क्रूर और बर्बर रही है। एक समय था जब राम के जमीन का हक मांगने वाले कारसेवकों पर उस समय की सरकारों ने गोलियां चलवाई थीं। इस गोलीबारी में कई कारसेवक मारे गए थे। राम मंदिर निर्माण के पीछे कई लोगों का योगदान है। जिसमें कई लोगों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया है। उनमें से कुछ लोग है जो अभी इस राम मंदिर के निर्माण को देख पाएं है उनमें से 2 नाम है उमा भारती और साध्‍वी ऋतंभरा मां का जिन्होंने इस पूरी घटना को बड़े करीब से देखा है।

गले लगते ही रो पड़ीं साध्‍वी ऋतंभरा

आज अयोध्या में राम मंदिर परिसर के भीतर जब उमा भारती और साध्‍वी ऋतंभरा ने एक दूसरे से मुलाकात की तो यह पल भावुक कर देने वाला था। दरअसल साध्‍वी ऋतंभरा और उमा भारती ने एक दूसरे को गले लगाया। इस दौरान साध्‍वी ऋतंभरा रोने लगीं। बता दें कि साध्‍वी ऋतंभरा और उमा भारती न राम मंदिर के निर्माण में काफी सहयोग किया है।

जीवन का सबसे बड़ा सपना हुआ पूरा

जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई, तब उसमें पूर्व सीएम उमा भारती और साध्‍वी ऋतंभरा ही थीं जिन्होंने वाणी से कारसेवकों में उर्जा भरने का काम किया था। उनके भाषणों का परिणाम था कि कारसेवक बिना थके, बिना रुके और झुके लगातार कारसेवा करते रहे। आज जब इनका सपना पूरा तो इनके भाव देखने योग्य थे। जब जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा होता है तो उसकी खुशी को बयां करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। ऐसा ही एक दृश्य रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में आए हुए मेहमानों में देखा गया।

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