कांग्रेस ने ही नहीं इन पार्टियों ने भी बनाई Ram Mandir के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूरी, जाने किसने क्या कहा?

Ram Mandir: राम मंदिर समारोह में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि कई और पार्टियों ने भी इस समारोह में शामिल होने से मना कर दिया है। हम यहां आपको उन पार्टियों के विषय में बता रहें है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम के नए मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है। ऐसे में पूरा देश राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही देश में इसको लेकर राजनीति भी चरम पर हो रही है। चूकि 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। इस लिए यह उद्घाटन देश में सियासत की धुरी बन गया है। जहां एक तरफ लोग राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शिरकत करने के लिए निमंत्रण का इंतजार कर रहें है, तो वहीं दूसरी ओर जिनको निमंत्रण मिल गया है वो इस पर राजनीति कर रहें है। बीते दिनों कांग्रेस पार्टी ने इस कार्यक्रम में शामिल न होने की बात कह कर इसको नया मोड़ दे दिया है।

कांग्रेस के रुख पर भाजपा हमलावर

आपको बता दें राम मंदिर समारोह में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि कई और पार्टियों ने भी इस समारोह में शामिल होने से मना कर दिया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इस कार्यक्रम को BJP और RSS का कार्यक्रम कह कर यहां जाने से मना कर दिया है। इसके बाद पूरे देश में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर एक अलग बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के इस फैसले के बाद जहां एक तरफ कई कांग्रेसी भी इससे खुश नहीं नजार आ रहें है। तो वहीं दुसरी तरफ भाजपा ने इस पर हमलावर रुख अपना लिया है। हम आपको यह उन पार्टियों के विषय में बताने जा रहें जिन्होंने इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से इंकार कर दिया है।

राम मंदिर कार्यक्रम में शामिल नहीं होगी कांग्रे

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि पिछले महीने 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में आयोजित होने वाले राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला था। भगवान राम की पूजा-अर्चना करोड़ों भारतीय करते हैं। धर्म मनुष्य का व्यक्तिगत विषय होता आया है, लेकिन बीजेपी और आरएसएस ने वर्षों से अयोध्या में राम मंदिर को एक राजनीतिक परियोजना बना दिया है। ऐसे में 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए और भगवान राम का सम्मान करने वाले लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी ने स्पष्ट रूप से आरएसएस/बीजेपी के कार्यक्रम के निमंत्रण को सम्मानपूर्वक अस्वीकार कर दिया है। इसको लेकर अब कांग्रेस पार्टी में ही विरोध बढ़ गया है। कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने निमंत्रण को ठुकराने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के इस फैसले से मेरा दिल टूट गया है। वहीं, गुजरात के कांग्रेस विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की है।

शिवसेना (यूबीटी) भी कर चुकी मना

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) भी राम मंदिर समारोह में शामिल न होने की बात कह चुका है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि पार्टी का कोई भी नेता इसमें शामिल नहीं होगा। राउत ने कहा कि ये भाजपा का कार्यक्रम है और इसमें हमारा कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं होने जा रहा है।

सीपीएम और ममता ने भी किया किनारा

सीपीएम ने भी राम मंदिर कार्यक्रम से पहले ही किनारा कर लिया है। सीपीएम नेता वृंदा करात और सीताराम येचुरी ने इसे एक धर्म को बढ़ावा देने का कार्यक्रम बताया था। वहीं, ममता बनर्जी का इस समारोह में शामिल होना भी मुश्किल लग रहा है। इसको लेकर वो अपनी पार्टी के नेताओं को संकेत भी दे चुकी हैं।

अखिलेश ने भी नहीं स्वीकारा था निमंत्रण

इसके साथ उत्तर प्रदेश में सपा पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहें है। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद की तरफ से आलोक कुमार ने अखिलेश यादव को समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि हम जिसे जानते नहीं उससे निमंत्रण नहीं लेते। हालांकि, अखिलेश ने आगे कहा कि हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम आ रहे हैं और जब वो बुलाएंगे हम जाएंगे।

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