नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम में विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व कांग्रेस नेता भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सत्ताधारी पार्टी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधा है। गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी में शामिल होने वाले नेता अपने राजनीतिक सफर में अब महत्वहीन हो चुके हैं और भूपेन बोरा का भी यही हाल होगा। उन्होंने सरमा को ‘असम का जिन्ना’ कहकर आरोप लगाया कि उन्हें नेताओं को हिंदू प्रमाण पत्र बांटना बंद कर देना चाहिए।
गोगोई ने कांग्रेस को समंदर के समान बताते हुए कहा कि पार्टी हमारे पूर्वजों के अस्तित्व से पहले से मौजूद है और हम सब उसमें पानी की बूंदें मात्र हैं।
”मुकाबला असली कांग्रेस और पुरानी कांग्रेस के बीच होगा”
गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी पुराने कांग्रेस नेताओं से भरी हुई है, जो राज्य में कांग्रेस के 15 साल के शासनकाल में सबसे भ्रष्ट माने जाते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व सीएम सरबानंद सोनोवाल की एजीपी पार्टी विलुप्त होने की कगार पर थी, इसी तरह कई पुराने नेता अब चुनावी तौर पर कोई असर नहीं डालेंगे। उन्होंने साफ किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला असली कांग्रेस और पुरानी कांग्रेस के बीच होगा।
”कांग्रेस अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है”
भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में अपनी कोई जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन गठबंधन वार्ता के मुख्य कर्ताधर्ता हैं। इसके साथ ही भूपेन बोरा ने यह भी बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके इस्तीफे के बारे में एक शब्द तक नहीं कहा, जबकि उन्होंने कांग्रेस को आगे बढ़ाने में योगदान दिया था।
”कांग्रेस चुनाव में मजबूती से मुकाबला करेगी”
भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने की तारीख 22 फरवरी तय की गई है। गौरव गोगोई ने इसे चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं डालने वाला बताया और कहा कि पुराने नेताओं के शामिल होने से बीजेपी को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर चुनाव में मजबूती से मुकाबला करेगी।
असम के राजनीतिक समीकरण में बड़ा मोड़
यह घटना असम की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच जारी जंग को और तेज कर सकती है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अब रणनीति बदलने पर मजबूर हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी समीकरण में बड़ा मोड़ मान रहे हैं।





