नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार (16 फरवरी 2026) को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंपा था, लेकिन कुछ ही घंटों में उन्होंने यह इस्तीफा वापस ले लिया। बोरा ने इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी हाईकमान उनकी बातों और मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने सुबह करीब 8 बजे केंद्रीय नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेजा था, जिसे सीनियर नेताओं और राहुल गांधी समेत पार्टी नेतृत्व ने लंबी बातचीत के बाद वापस लेने का निर्णय लिया।
असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं
भूपेन बोरा ने अपने इस्तीफे में कहा था कि यह कदम उन्होंने आत्मसम्मान की रक्षा और पार्टी की लीडरशिप की कमजोरी पर चिंता व्यक्त करने के लिए उठाया। उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कामकाज और समय पर अहम फैसले न लेने की आलोचना की। असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
अचानक वापसी का कारण?
असम कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि कभी-कभी कांग्रेस परिवार में मतभेद होते हैं, लेकिन पार्टी प्रेसिडेंट ने भूपेन बोरा के इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया। पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व ने उनसे बातचीत की और विवाद को सुलझा लिया। भूपेन बोरा पिछले 30 सालों से कांग्रेस के अहम सदस्य रहे हैं।
”पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया था”
उन्होंने कहा कि पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया था क्योंकि कई बार उनकी चिंता के बावजूद टॉप लीडरशिप की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई अचानक निर्णय नहीं था और उन्होंने इसे गहन सोच-विचार के बाद लिया।
बीजेपी का ऑफर और राजनीतिक संकेत
कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद, बीजेपी ने भूपेन बोरा को ऑफर दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भाजपा के दरवाजे उनके लिए खुले हैं और अगर वह शामिल होते हैं तो पार्टी उन्हें किसी सुरक्षित सीट से चुनाव जितवाने की कोशिश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल बोरा ने भाजपा से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क नहीं किया है।
भूपेन बोरा की असम की राजनीति में वापसी
भूपेन बोरा का इस्तीफा और अचानक वापसी असम की राजनीति में सियासी हलचल पैदा कर चुकी है। यह घटना पार्टी नेतृत्व की भूमिका और आगामी विधानसभा चुनावों में नेताओं के अंदरूनी मतभेद को उजागर करती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बोरा का कदम यह दिखाता है कि असम कांग्रेस में नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया पर भरोसे की कमी थी, लेकिन लंबे समय तक पार्टी के भीतर बने रहने का उनका रुझान भी स्पष्ट है।


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