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Monday, March 2, 2026
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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, 10 हजार या 1 लाख दो… मुसलमानों का वोट नहीं मिलेगा

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में वोट केवल सरकारी योजनाओं या नकद सहायता से नहीं बदलते, बल्कि विचारधारा और पहचान से तय होते हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में मतदान के पैटर्न और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। निजी टीवी चैनल के एक कार्यक्रम में सरमा ने कहा कि असम में वोटिंग केवल सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर निर्भर नहीं करती। उनके अनुसार, कई समुदाय अपने राजनीतिक विकल्पों को विचारधारा और पहचान के आधार पर तय करते हैं, न कि आर्थिक प्रोत्साहन या सुविधाओं से।उन्होंने स्पष्ट किया कि असम में मतदाता केवल सरकारी योजनाओं या आर्थिक लाभ के लिए वोट नहीं देते, बल्कि उनका निर्णय विचारधारा और पहचान पर आधारित होता है।

हिमंता सरमा ने कहा, चाहे 10 हजार रुपये दें या 1 लाख, कुछ समुदाय, खासकर मुस्लिम मतदाता, अपना उम्मीदवार उसी आधार पर चुनते हैं जो उनकी विचारधारा और पहचान के अनुरूप हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर लाभार्थी उसी सरकार को वोट देगा।

सीएम ने कहा, चाहे 10 हजार रुपये दें या 1 लाख, कुछ मुस्लिम मतदाता हमें वोट नहीं देंगे। वोटिंग केवल सरकारी योजनाओं से तय नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी योजनाएं चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इससे हर नागरिक उसी सरकार को वोट नहीं देगा।

नकद मदद पर ‘ना’

एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या असम में महिलाओं को बिहार की तरह नकद सहायता दी जा सकती है, तो सीएम ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि कुछ समुदाय उनके काम की सराहना करते हैं, लेकिन चुनाव के समय उनकी राजनीतिक पसंद वित्तीय लाभ से प्रभावित नहीं होती।

जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंता

मुख्यमंत्री ने असम में तेजी से बदलती जनसांख्यिकी को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, 2021 में राज्य की मुस्लिम आबादी लगभग 38% थी और हर दशक में यह 4–5% बढ़ रही है। यदि यह रुझान जारी रहा, तो 2027 तक यह संख्या 40% तक पहुंच सकती है। सीएम सरमा का कहना है कि यदि मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो गई, तो अन्य समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर दबाव पड़ सकता है।

व्यक्तिगत संबंध वोट में नहीं बदलते

हिमंत सरमा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत संबंध मिया समुदाय की महिलाओं और कई मुस्लिम परिवारों से अच्छा है, लेकिन चुनाव में यह जुड़ाव वोट में तब्दील नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुस्लिम वोट कांग्रेस के साथ चले, तब भी भाजपा असम में अपनी स्थिति बनाए रख सकती है।सीएम ने अंत में जोर देकर कहा कि असम में उनके “अपने” वही लोग हैं, जो असमी और भारतीय पहचान से जुड़े हैं।उन्होंने यह भी कहा कि उनके व्यक्तिगत संबंध कई मुस्लिम परिवारों और महिलाओं के साथ अच्छे हैं, लेकिन चुनाव के समय यह रिश्ता वोट में तब्दील नहीं होता। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री ने यह भरोसा जताया कि भाजपा असम में अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखने में सक्षम है, चाहे मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर भी जाएं।सरमा ने कहा कि असम में वही लोग उनके अपने” कहे जा सकते हैं, जो खुद को असमिया और भारतीय पहचान से जोड़ते हैं।

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