नई दिल्ली: चीन लंबे समय से गलवान और उसके आसपास के क्षेत्र पर अपना हक जताता रहा है। सेना ने खुलासा किया है कि मई, 2020 में गलवान स्टैंड ऑफ के बाद चीनी सेना दो बार और भारतीय इलाकों में घुसने की कोशिश की थी। इस वजह से सितंबर, 2021 से नवंबर, 2022 के बीच भारत और चीन की सेनाओं के बीच कई बार झड़प हुई थी, इनमें कई जवानों को चोट आई थी।
दरअसल, बीते दिनों आर्मी ने सेना के जवानों के लिए वीरता पुरस्कार समारोह का आयोजन किया था। इस आयोजन का एक वीडियो 13 जनवरी को सेना के पश्चिम कमान के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया। इस वीडियो में इस बात का संक्षिप्त वर्णन है कि कैसे भारतीय सैनिकों ने चीन की पीपल लिबरेशन आर्मी यानी (PLA) के सैनिकों के आक्रामक व्यवहार का डटकर सामना किया था। इस वीडियो को 15 जनवरी को हटा दिया गया है।
भारतीय सैनिकों ने दिया था करारा जवाब
मई 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद भारतीय सेना चीन से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार थी। इस झड़प के बाद भारत और चीन की सेना के बीच LAC पर कई झड़प हुईं। चीनी सैनिकों ने एलएसी के तवांग सेक्टर में भी घुसपैठ की कोशिश की थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में जानकारी दी थी कि 9 दिसंबर, 2022 को पीएलए सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांगत्से क्षेत्र में एलएसी का उल्लंघन करने की कोशिश की और एकतरफा यथा स्थिति बदल दी। उन्होंने आगे कहा कि चीनी प्रयास का भारतीय सैनिकों ने साहसपूर्वक से मुकाबला किया।
वीरता पुरस्कार से नवाजा गया
सूत्रों ने बताया कि चीनी अतिक्रमण के प्रयास का दृढ़तापूर्वक से जवाब देने वाली टीम का हिस्सा रहे कई भारतीय सैनिकों को अलंकरण समारोह में वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।





