नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जल्द ही अपला बहुचर्चित चंद्रमिशन चंद्रयान-3 को लॉन्च करने जा रहा है। इसरो के अनुसार आने वाले शुक्रवार यानी 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे भारत अपना तीसरा चंद्र मिशन लॉन्च करेगा। सफल लॉन्च की प्रार्थना के लिए इसरो वैज्ञानिक की एक टीम आज चंद्रयान-3 के छोटे मॉडल को लेकर तिरुपति वेंकटचलपति मंदिर पहुंची थी। इसरो ने इस सप्ताह प्रक्षेपित किये जाने वाले चंद्रयान-3 मिशन के लिए संपूर्ण प्रक्षेपण तैयारी और प्रक्रिया का 24 घंटे का प्रक्षेपण पूर्वाभ्यास किया। मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को प्रक्षेपण यान मार्क 3 (एलवीएम3) से प्रक्षेपित किया जएगा।
श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को दोपहर 2.35 बजे लॉन्च
इससे पहले इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में बुधवार (05 जुलाई) को चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान को अपने नए प्रक्षेपण रॉकेट एलवीएम-3 से जोड़ा गया था। चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित रूप से उपकरण उतारने और उससे अन्वेषण गतिविधियां कराने के लिए चंद्रयान-2 के बाद इस महीने चंद्रयान-3 प्रक्षेपित किया जाने वाला है। इस लॉन्च को आप http://isro.gov.in पर और DD National पर लइव देख सकते है।
वैज्ञानिकों ने पूजा-अर्चना की
आंध्र प्रदेश के तिरुपति वेंकटचलपति मंदिर में इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के सफल लॉन्च की प्रार्थना की, साथ मे उन्होंने चंद्रयान-3 के छोटे मॉडल दिखाते हुए कहा कि यह चंद्रयान-3 है। आपको बता दें, इसरो ने हाल ही में घोषणा की थी कि इसरो चंद्रयान के तीसरे मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 14 जुलाई को दोपहर बाद 2:35 बजे लॉन्च करेगा।
चंद्रयान-3 है क्या?
इसरो के अधिकारियों के मुताबिक, चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है, जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और परीक्षण करेगा। इसमें एक प्रणोदन मॉड्यूल, एक लैंडर और एक रोवर होगा। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर है। मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए गए हैं। एल्गोरिदम को बेहतर किया गया है। जिन वजहों से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह नहीं उतर पाया था, उन पर फोकस किया गया है।
क्या है चंद्रयान 3 का लक्ष्य?
इसरो के एक अधिकारी ने कहा हमारा लक्ष्य इसे 13 जुलाई को प्रक्षेपित करने का है। चंद्रयान-3 मिशन के तहत चंद्रमा के चट्टानों की ऊपरी परत की थर्मोफिजिकल विशेषताएं, चंद्रमा पर भूकंप आने की बारंबारता, चंद्रमा की सतह पर प्लाज्मा वातावरण और उपकरण उतारे जाने वाले स्थान के निकट तत्वों की संरचना का अध्ययन करने वाले उपकरण भेजे जाएंगे। इसरो अधिकारियों के अनुसार, लैंडर और रोवर पर लगे इन वैज्ञानिक उपकरणों को ‘चंद्रमा का विज्ञान’ विषय में रखा जाएगा, जबकि प्रायोगिक उपकरण चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी का अध्ययन करेंगे, जिन्हें ‘चंद्रमा से विज्ञान’ विषय में रखा जाएगा।





