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Wednesday, March 25, 2026
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कोंडागांव : पीएचई द्वारा हैंडपंप लगाने किए गये बोर खनन को वन विभाग ने उखाड़ फेंका

कलेक्टर के निर्देश पर ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिये हो रहा था बोर खनन कोण्डागांव, 08 अप्रैल (हि.स.)। कलेक्टर द्वारा ग्रामीणजनों की मांग पर हेण्ड पम्प लगाने के दिए गए निर्देश का पालन करते हुए पीएचई विभाग द्वारा हैण्डपम्प लगाने हेतु करवाए जा रहे नलकूप खनन के कार्य को वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा न केवल रोका गया बल्कि केसिंग पाइप तक को निकलवाकर गड्ढ़े को पटवा दिया। यह बताने के लिए काफी है कि कोण्डागांव जिले में कमिश्नर व कलेक्टर के दिशा-निर्देशों की कोई अहमियत नहीं रह गई है। मामले को बेहद संवेदनशील इसलिए कहा जा सकता है। क्योंकि यह मामला आदिवासी बाहुल्य इलाके के मूल आदिवासी लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराए जाने से सम्बन्धित है। ज्ञात हो कि जिला व तहसील कोण्डागांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कमेला के डोमूढ़ोडा पारा में निवासरत 7 आदिवासी परिवार के सदस्यों के द्वारा कुंवरसिंह नेताम के नेतृत्व में 15 फरवरी 2021 को जिला कार्यालय में आयोजित होने वाले जन चौपाल में आवेदन देकर कलेक्टर को अवगत कराया गया था कि डोमूढ़ोडा पारा में निवासरत लोग विगत 35 साल से झरिया का गंदा पानी पी रहे हैं, जिससे उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए डोमूढ़ोडापारा में निवासरत लोगों के लिए एक हेण्ड पम्प लगवाया जाए जिससे कि पीने योग्य पानी उपलब्ध हो सके। जन चैपाल में प्रस्तुत आवेदन का संज्ञान में लेकर कलेक्टर कोण्डागांव ने कार्यालय कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोण्डागांव जिला कोण्डागांव को हेण्ड पम्प लगाने हेतु निर्देशित किया। जिस पर कार्यालय कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोण्डागांव जिला कोण्डागांव ने कलेक्टर जन चौपाल पोर्टल में प्राप्त शिकायत टोकन नं. 2230120000661 के निराकरण के सम्बन्ध में अवगत कराया कि ग्रापं. कमेला के डोमूढ़ोडापारा का निरीक्षण किया गया। उक्त पारा मुख्य बस्ती से लगभग डेढ़ किमी दूर है, जहां 07 घरों में लगभग 30-35 लोग रह रहे हैं। एक सप्ताह के अंदर नलकूप खनन कर हेण्ड पम्प स्थापना का कार्य सम्पन्न करा दिया जाएगा। इसके बाद जब लो.स्वा.यां.खण्ड कोण्डागांव के नलकूप खनन वाहन से चार अप्रैल 2021 रविवार को डोमूढ़ोडा पारा में बोर खनन कर केसिंग लगाया जा रहा था, ठीक उसी वक्त वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बोर खनन कार्य में लगे कर्मचारियों से न केवल केसिंग को निकलवा दिया, बल्कि गड्ढे तक को पटवा दिया। वहीं डोमूढ़ोडापारा वासियों के हेण्ड पम्प हेतु प्रस्तुत आवेदन के निराकरण के सम्बन्ध में कलेक्टर जन चौपाल पोर्टल में पत्र की स्थिति पूर्ण बताई गई है, जिसका अर्थ होता है ग्रामीणजनों द्वारा समस्या समाधान हेतु प्रस्तुत आवेदन को निराकृत कर दिया गया है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आज भी डोमूढ़ोडापारा वासी आदिवासी जन झरिया का पानी पीने को मजबूर हैं। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव गुप्ता

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