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Friday, March 20, 2026
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कोण्डागांव : मक्का प्रसंस्करण प्लांट में स्टार्च निर्माण के स्थान पर होगा इथेनाॅल निर्माण

मक्का प्रसंस्करण प्लांट निर्माण हेतु रणनीति पर मुख्य सचिव ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग से की चर्चा कोण्डागांव 30 जून (हि.स.)। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मक्का प्रसंस्करण प्लांट में स्टार्च निर्माण के स्थान पर इथेनाॅल निर्माण इकाई स्थापित करने हेतु रणनीति तैयार करने के लिये वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सचिवालय से वित्त सचिव अलरमेलमंगई डी एवं जिला कार्यालय से कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा, डिप्टी कलेक्टर पवन कुमार प्रेमी, सहायक पंजीयक केएल उईके शामिल हुए। इस बैठक में मुख्य सचिव द्वारा कलेक्टर को जल्द से जल्द स्थल का सर्वे कर डीपीआर निर्माण एवं कार्ययोजना 45 दिनों में बनाने के निर्देश दिये गये। पूर्व में बन रहे मक्का प्रसंस्करण प्लांट के स्टार्च निर्माण इकाई के अब तक निर्मित संरचनाओं के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा उनका प्रबंधन राज्य शासन की सहायता से इथेनाॅल निर्माण में प्रयुक्त करने के साथ प्रबंधन किये जाने की बात कही गई। इसके अतिरिक्त इथेनाॅल निर्माण के लिए राज्य शासन के निर्णय अनुसार ऋण पर गारंटी दी जायेगी, ताकि प्लांट निर्माण के लिए आसान शर्तों पर ऋण प्राप्त किया जा सके। ऋण हेतु व्यवसायिक बैंकों से ब्याज दरों पर छूट से प्लांट निर्माण के कार्य में तेजी आयेगी। बैठक में प्लांट हेतु पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप अथवा समिति द्वारा निर्माण के संबंध में शासन द्वारा अनुशंसा के उपरांत ही निर्णय लेने पर सहमति जताई गई। ज्ञात हो कि मक्का प्रसंस्करण प्लांट से बनने वाले स्टार्च, ग्लूटन, फाइबर, जर्म मील, हस्क निर्माण के पश्चात् उसके मुख्य उत्पाद स्टार्च की मार्केटिंग एवं वितरण की लागत बहुत अधिक होती है तथा मक्का प्रसंस्करण में प्रमुख उत्पाद के रूप में 63 प्रतिशत स्टार्च उत्पादन किया जाना था। जिसका भूमिपूजन के पश्चात् से अब तक खुले बाजार में कीमतों में 35 प्रतिशत तक कमी हुई है। इन उत्पादों के निर्माण में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अचानक से मांग पक्ष में भी कमी देखने को मिल रही थी। जिससे मक्का प्रसंस्करण इकाई को लगातार घाटा होने की संभावना बढ़ती जा रही थी, साथ ही इसके प्रारंभिक क्षमता को 60 प्रतिशत से अधिक नहीं किया जा सकता था। जिससे घाटे का अंतराल और बढ़ने से प्लांट को आगामी 06 से 08 वर्षों तक घाटे में संचालित करना होता। जिसे देखते हुए राज्य शासन ने जिला प्रशासन की अनुशंसा पर निर्णय लेते हुए मक्का प्रसंस्करण इकाई में स्टार्च निर्माण के स्थान पर इथेनाॅल निर्माण का निर्णय लिया गया। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव गुप्ता

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