नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 24 जुलाई 2024 को सौर्य एयरलाइन के एक छोटे विमान में उड़ान भरते समय आग लग गई। सौर्य एयरलाइन के इस छोटे विमान में 19 यात्री भी मौजूद थे। जो कि इस विमान हादसे की चपेट में आ गए। इस हादसे के कारण 18 यात्रियों की मौत हो गई। वहीं नेपाल में हुए इस विमान हादसे के बाद टेबलटॉप रनवे को लेकर लोगों के मन में काफी सवाल उठ रहे हैं।
टेबलटॉप रनवे आखिर होता क्या है?
मीडिया में भी टेबलटॉप रनवे काफी सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है। टेबलटॉप रनवे का चर्चा में आने का मुख्य कारण पूरी दुनिया में इस तरह के रनवे की वजह से कई बड़ी दुर्घटनाओं का होना है। आइए जानते हैं कि टेबलटॉप रनवे आखिर होता क्या है? टेबलटॉप रनवे जिस भी देश में होते हैं, वो अधिकतर ऊंचाई वाली जगह पर ही स्थित होते हैं। इस तरह के रनवे पहाड़ी या पठार वाले इलाकों में होते हैं। टेबलटॉप रनवे के दोनों तरफ खाई होती है। इस तरह के रनवे में विमान को लैंडिंग कराना बड़ा ही मुश्किल होता है।
पायलट को बड़े सूझबूझ के साथ लैंडिंग करनी होती है
पायलट को बड़े सूझबूझ के साथ लैंडिंग करनी होती है। इसके बावजूद भी दुनिया के कई टेबलटॉप रनवे पर बड़ी दुर्घटनाओं को होते हुए देखा गया है। इस तरह के रनवे पर दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण यह है कि अगर पायलट लैंडिंग के समय अगर रनवे से थोडा सा भी आगे चला जाता है तो विमान का खाई में गिरने का डर बना रहता है।
भारत में स्थित टेबलटॉप रनवे
वहीं अगर भारत में स्थित टेबलटॉप रनवे की बात करें तो इस तरह के 5 हवाई अड्डे हमारे देश में हैं। इन पांच हवाई अड्डो के नाम शिमला, मैंगलोर, कालीकट, पाकयोंग (सिक्किम) और लेंगपुई (मिजोरम) है। ये हवाई अड्डे पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों में बने हुए हैं। जहां विमान को लैंडिंग करना एक बड़ी चुनौती से कम नहीं होता हअन्य खबरों के लिए क्लिक करें:- www.raftaar.in
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