नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एमपॉक्स प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बताया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बना हुआ है, जिसमें बढ़ते मामले, भौगोलिक प्रसार और परिचालन मानव जीवन के लिए चुनौतियों के रूप में आज हमारे सामने हैं। 2024 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज द्वारा प्रदान की गई एक रंगीन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप छवि में संक्रमित कोशिकाओं के भीतर पाए जाने वाले नारंगी रंग के एमपॉक्स वायरस कण हरे रंग में दिखाई देते हैं।एमपॉक्स एक वायरल संक्रमण है जो निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है, जिससे अक्सर फ्लू जैसे लक्षण और मवाद भरे घाव हो जाते हैं। आम तौर पर हल्के होने के बावजूद, वायरस कुछ मामलों में घातक साबित हुआ है।
इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताया गया है कि अगस्त में पहली बार एक नए एमपॉक्स वैरिएंट, क्लेड आईबी के उभरने के बाद यह प्रकाश में आया, जो कांगो के लोकतांत्रिक गणराज्य से पड़ोसी देशों और उससे आगे तक फैल गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एमपॉक्स प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में वर्गीकृत करना जारी रखा है और इसे दूसरी बार वैश्विक स्वास्थ्य संकट घोषित किया है। इस वैरिएंट के मामलों की पुष्टि यूके, जर्मनी, स्वीडन और भारत सहित कई क्षेत्रों में हुई है।
मैनिटोबा से आए एक यात्री में मिला एमपॉक्स का लक्षण
अभी कनाडा की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी (PHC) ने मैनिटोबा से आए एक यात्री में एमपॉक्स के देश के पहले मामले की पुष्टि की है। व्यक्ति को अपनी यात्रा के दौरान मध्य और पूर्वी अफ्रीका में प्रकोप से जुड़े वायरस का संक्रमण हुआ और उसने कनाडा लौटने पर चिकित्सा देखभाल की मांग की। पीएचएसी ने बताया है कि मामले की पहचान नेशनल माइक्रोबायोलॉजी लेबोरेटरी द्वारा परीक्षण के बाद क्लेड आईबी एमपॉक्स के रूप में की गई।
क्या है एमपॉक्स?
आपको बता दें कि एमपॉक्स, जिसे पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था, एक वायरल संक्रमण है जो निकटवर्ती के संपर्क के माध्यम से फैलता है। यह आमतौर पर फ्लू जैसे लक्षण और पुस्टुलर घाव पैदा करता है। गंभीर मामलों में संभावित रूप से मृत्यु तक हो जाती है। इस साल अब तक, अकेले अफ्रीका ने 46,000 से अधिक संदिग्ध मामलों की पुष्टी की जा चुकी है। यहाँ मुख्य रूप से कांगो में तो एक हजार से अधिक संदिग्ध मौतें हुई हैं। पिछले महीने के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) आंकड़ों के अनुसार, नाइजीरिया जो एमपॉक्स इस बीमारी का केंद्र बना में 94 पुष्ट मामले दर्ज किए हैं। देश ने अबुजा में स्वास्थ्य कर्मियों और प्रतिरक्षाविहीन व्यक्तियों का टीकाकरण शुरू किया जा चुका है, इसने बीते अगस्त माह में अमेरिका से अपनी पहली 10,000 वैक्सीन खुराक प्राप्त की थी। लेकिन पाया गया कि इनसे काम नही चलने वाला है तब डब्ल्यूएचओ ने सितंबर में बवेरियन नॉर्डिक के टीके को मंजूरी दे दी और हाल ही में जापान के केएम बायोलॉजिक्स के शॉट को आपातकालीन उपयोग के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1970 में पहली बार मनुष्यों में पहचाने जाने वाले एमपॉक्स वायरस ने 2022 तक मुख्य रूप से सबसे ज्यादा अफ्रीकी क्षेत्रों को प्रभावित किया है, वैज्ञानिकों की वर्तमान चिंता क्लेड आईबी के प्रसार पर केंद्रित है, जो बड़े पैमाने पर यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। अबवायरस के आगे प्रसार को रोकने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया को बनाए रखने के प्रयास चल रहे हैं।





