नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पिछले कुछ सालों से भारत की विदेश नीति की चारों ओर तारीफ होती रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय पश्चिमी देश और अमेरिका के दबाव में ना आकर रूस से राजनैतिक और व्यापारिक साझेदारी बनाये रखने पर भारत की उसके विरोधियों ने भी तारीफ की, लेकिन अब हमारे पड़ोस में फैली अराजकता ने देश के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बांग्लादेश में पीएम शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी वहां के हालात सामान्य नहीं हुए हैं। जबकि शेख हसीना अपने देश को छोड़कर भारत आ चुकी हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार
बांग्लादेश में हो रही हिंसा में सबसे ज्यादा परेशानी बांग्लादेश में रह रहे हिंदु समुदाय को हो रही है। बांग्लादेश में रह रहे 1.30 करोड़ हिंदुओं के साथ खौफनाक हिंसा की वारदातें हो रही हैं। उनके घरों, मंदिरों और अन्य संपत्तियों पर हमला कर उन्हें लूटा और आग के हवाले किया जा रहा है। ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती आ गई है। भारत को बांग्लादेश में अपने हितों का संरक्षण और वहां रह रहे हिंदुओं के भविष्य को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आ गई है।
चीन और पाकिस्तान समर्थकों ने किया तख्तापलट
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में जो हुआ वो विदेशी साजिशों के चलते हुआ है। बांग्लादेश में चीन और पाकिस्तान समर्थक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भारत समर्थक शेख हसीना को साजिश रचकर सत्ता छोड़ने और देश से निर्वासित होने पर मजबूर किया। चीन और पाकिस्तान ने छात्र आंदोलन की आड़ में अराजकता और उन्माद फैलाकर अपने मकसद में कामयाब रहे।
शेख हसीना ने कट्टरपंथियों पर लगाईं थी लगाम
बांग्लादेश की निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भले ही अन्य मोर्चों पर असफल साबित हुईं हो लेकिन उन्होंने इस्लामिक कट्टरपंथियों और भारत विरोधी ताकतों को नियंत्रित रखा था। अब जानकारी आ रही है कि हसीना की पार्टी आवामी लीग को अंतरिम सरकार से दूर रखा जाएगा। वहीं बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और प्रतिबंधित जमात ए इस्लामी सरकार में रहेंगे और अगुवाई करेंगे।
जमात ए इस्लामी का पाकिस्तान के साथ है गहरा गठजोड़
जमात ए इस्लामी का पाकिस्तान के साथ गहरा गठजोड़ है। जमात ए इस्लामी पर आईएसआई के गठजोड़ से बांग्लादेश में भारत विरोधी अभियान चलाने का आरोप लगता है। वहीं बीएनपी को भारत विरोधी पार्टी माना जाता है। BNP जब-जब सत्ता में आई है तब-तब भारत और बांग्लादेश के संबंध खराब हुए हैं। अब BNP और जमात ए इस्लामी सत्ता के केंद्र में आ गए हैं।
भारत को इसलिए लग रहा डर
आज की बदली परिस्थितियों में भारत को ये डर सता रहा है कि अगर बांग्लादेश के यहीं हालात रहे तो वहां फैली अशांति का असर भारत में भी हो सकता है। शेख हसीना के शासनकाल में बांग्लादेश में राजनीतिक स्थितिरता थी। जिसकी वजह से भारत और बांग्लादेश ने मिलकर आर्थिक प्रगति की। वहीं बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता का सीधा फायदा भारत को हुआ। बांग्लादेश की वजह से भारत ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति कायम रखने में कामयाब रहा। शेख हसीना शासन की कड़ाई के चलते तस्करी की समस्या पर रोक लग सका।
कनाडा ना बन जाए बांग्लादेश
भारत को बड़ी चिंता सता रही है कि कहीं बांग्लादेश भी कनाडा की तरह भारत विरोधी तत्वों का अड्डा ना बन जाए। शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने में पाकिस्तान समर्थित इस्लामी कट्टरपंथियों की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में अब बांग्लादेश में आतंकवादी तत्वों के उभार की पूरी आशंका है। जून महीने में ही दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों मोदी और हसीना की मुलाकात हुई थी तो बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों पर लगाम लगाने के उपायों पर चर्चा की गई थी। अब भारत सरकार को तय करना है कि वो बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर कैसा रवैया अपनाता है।
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