नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही सऊदी अरब के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म है खासकर भारत के वक्फ संशोधन कानून को लेकर। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब भारत में वक्फ कानून में बदलाव से कुछ मुस्लिम संगठन नाराज़ हैं, तो वहीं एक इस्लामिक देश सऊदी अरब पीएम मोदी का खुले दिल से स्वागत कर रहा है। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि सऊदी अरब का वक्फ कानून क्या कहता है और भारत के कानून से कितना अलग है।
वक्फ क्या होता है?
वक्फ एक इस्लामिक व्यवस्था है जिसके तहत किसी संपत्ति को धार्मिक या सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया जाता है। इसका उपयोग मस्जिद, कब्रिस्तान, मदरसे या चैरिटी के लिए होता है। इसे बेचा नहीं जा सकता और न ही निजी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
भारत बनाम सऊदी: वक्फ कानून में बड़ा फर्क
भारत में वक्फ बोर्ड एक स्वतंत्र संस्था होती है, जिसे केंद्र या राज्य सरकार बनाती है। सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता। सऊदी में वक्फ पूरी तरह सरकार के अधीन है। Ministry of Islamic Affairs और एक उलेमा कमेटी इसका संचालन करती है।
किस कानून के तहत होता है संचालन?
भारत में वक्फ कानून एक नागरिक कानून है। यहां धर्मनिरपेक्षता के तहत सिविल कोर्ट और वक्फ ट्रिब्यूनल में केस चलते हैं। सऊदी में शरीयत (इस्लामिक कानून) ही वक्फ मामलों का आधार है। यहां शरिया कोर्ट ही ऐसे मामलों की सुनवाई करती है। भारत में वक्फ संपत्ति वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड होती है। कई बार रिकॉर्ड अधूरा या विवादित होता है। सऊदी में हर वक्फ संपत्ति मंत्रालय में बाकायदा रजिस्टर्ड होती है। सरकार के पास पूरा रिकॉर्ड और उपयोग का हिसाब होता है।
सऊदी का सख्त कंट्रोल और पारदर्शिता
सऊदी सरकार के वक्फ मंत्रालय का वक्फ संपत्तियों पर पूरा नियंत्रण है। मंत्रालय यह तय करता है कि वक्फ से मिली संपत्ति और पैसे का उपयोग कहां होगा। सरकार हर वक्फ संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड रखती है। Vision 2030 के तहत सऊदी अरब 350 बिलियन रियाल वक्फ प्रॉपर्टी से देश के विकास में लगाने जा रहा है।
भारत में क्यों है विवाद?
भारत में हाल ही में वक्फ संशोधन कानून लाया गया है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की गई है। लेकिन कुछ धार्मिक संस्थाएं इसे सरकार का हस्तक्षेप मान रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर बहस तेज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा सऊदी दौरा है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उन्हें खास न्योते पर बुलाया है। दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं, और वक्फ जैसे मुद्दों पर समझ और सहयोग की उम्मीद जताई जा रही है। भले ही भारत और सऊदी अरब का वक्फ कानून अलग हो, लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही है – धार्मिक और सामाजिक कल्याण। फर्क बस नियंत्रण और व्यवस्था के तरीकों में है।





