नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही विरोध तेज हो गया है। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के खिलाफ युवाओं और जेन-जी आंदोलन से जुड़े लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। आंदोलन के नेता सुदन गुरुंग ने कड़े शब्दों में पीएम कार्की को चेतावनी दी और जनभावनाओं की अनदेखी न करने की सलाह दी।
युवा नेता सुदन गुरुंग की पीएम को चुनौती
आंदोलन के मुख्य चेहरा और Gen-Z प्रदर्शनकारी सुदन गुरुंग ने प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को चेतावनी दी कि “जिसे मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी तक लाया हूं, उसे हटाने में देर नहीं करूंगा।” उनका संगठन ‘हामी नेपाल’, जिसे इस आंदोलन की रीढ़ माना जाता है, अब सरकार के फैसलों से खुद को उपेक्षित और नजरअंदाज महसूस कर रहा है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
खासकर शहीदों के परिजनों की प्रधानमंत्री से मुलाकात न हो पाना और मंत्रियों के चयन में संगठन की अनदेखी ने सुदन गुरुंग की नाराज़गी को और स्पष्ट कर दिया है। यही कारण है कि सरकार और आंदोलनकारी संगठन के बीच तनाव गहराता जा रहा है।
मंत्रिमंडल में तीन नेताओं को जगह की मांग
रविवार (14 सितंबर) की रात काठमांडू स्थित प्रधानमंत्री आवास बलुवाटार के बाहर हंगामा हुआ। मृतकों के परिजनों के साथ कई Gen Z समूहों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। इसी विरोध के बीच आज मंत्रिमंडल का विस्तार होना है, लेकिन शपथ केवल तीन मंत्रियों को ही दिलाई जाएगी।
ओमप्रकाश अर्याल पर क्यों नाराज है प्रदर्शनकारी?
मिली जानकारी के मुताबिक, ओमप्रकाश अर्याल को गृह व न्याय मंत्रालय, पूर्व वित्त सचिव रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्रालय और कुलमान घीसिंग को ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ओमप्रकाश अर्याल, जो पहले आंदोलनकारियों से वार्ता कर रहे थे, बाद में सौदेबाजी कर मंत्री पद लेने को तैयार हो गए। इसी कारण उनका भी पीएम आवास के बाहर विरोध हुआ।
गुरुंग समर्थकों ने सरकार पर लगाए आरोप
सुदन गुरुंग के समर्थक का कहना है कि, सरकार जनआंदोलन की भावनाओं की अनदेखी कर रही है। सुदन गुरुंग ने कहा कि, वे शहीदों के परिजनों की आवाज उठाते रहेंगे और यदि स्थिति नहीं बदली तो वे पीएम सुशीला कार्की की सत्ता को चुनौती देने से पीछे नहीं हटेंगे।





