नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर दुनिया में अमेरिका के सैन्य दखल के इतिहास पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका ने अब तक कितने देशों में सैन्य कार्रवाई की है और इसका असर किन देशों पर सबसे ज्यादा पड़ा है।
400 से ज्यादा सैन्य दखल के रिकॉर्ड
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1776 से 2026 के बीच अमेरिका ने दुनिया भर में 400 से ज्यादा सैन्य दखल किए हैं। इनमें से ज्यादातर ऑपरेशन 1950 के बाद हुए। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका एक वैश्विक सुपरपावर के रूप में उभरा और इसके बाद कई देशों में युद्ध, हवाई हमले और सैन्य अभियान चलाए गए। बताया जाता है कि 1945 के बाद अमेरिका ने कम से कम 30 देशों पर बमबारी की और करीब 96 देशों में किसी न किसी रूप में सैन्य हस्तक्षेप किया। इन कार्रवाइयों में सीधे युद्ध, हवाई हमले, नौसेना की कार्रवाई, सहयोगी देशों को सैन्य समर्थन और गुप्त ऑपरेशन भी शामिल रहे हैं।
इन देशों पर सबसे ज्यादा असर
अमेरिका के सैन्य अभियानों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान और लाओस का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने इतने बम गिराए थे कि वह दूसरे विश्व युद्ध में इस्तेमाल हुए बमों से भी ज्यादा बताए जाते हैं। वहीं लाओस को दुनिया का सबसे ज्यादा बमबारी झेलने वाला देश माना जाता है, जहां कोल्ड वॉर के दौरान लाखों टन विस्फोटक गिराए गए थे। 21वीं सदी में शुरू हुए अफगानिस्तान और इराक युद्ध ने इन देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया। इन युद्धों की वजह से लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, आर्थिक स्थिति कमजोर हुई और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई।
राजनीतिक दखल और सत्ता परिवर्तन के आरोप
सैन्य कार्रवाई के अलावा अमेरिका पर कई देशों में राजनीतिक दखल देने और सत्ता परिवर्तन को समर्थन देने के आरोप भी लगते रहे हैं। 1953 में ईरान में तख्तापलट इसका सबसे चर्चित उदाहरण माना जाता है। उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA पर आरोप लगा था कि उसने लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को हटाने में भूमिका निभाई थी। इसी तरह 1973 में चिली में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे की सरकार गिरने में भी अमेरिकी भूमिका को लेकर आरोप लगे थे। इसके अलावा 2011 में लीबिया में हुए सैन्य हस्तक्षेप के बाद वहां के नेता मुअम्मर गद्दाफी का शासन खत्म हो गया।
ईरान के साथ लंबे समय से तनाव
ईरान उन देशों में से एक है जहां अमेरिका ने कई बार राजनीतिक और सैन्य दोनों तरह से दखल दिया है। 1953 के तख्तापलट के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण रहे हैं। 1988 में ऑपरेशन प्रेइंग मेंटिस के दौरान फारस की खाड़ी में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच सीधी सैन्य झड़प भी हुई थी। हाल के वर्षों में भी दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। 2025-2026 में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरानी सैन्य ढांचे पर हमलों की खबरों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों का असर सिर्फ उन देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से जब भी अमेरिका किसी नए सैन्य ऑपरेशन में शामिल होता है, तो दुनिया भर में इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।





