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Monday, March 2, 2026
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भारत-US समझौते पर अमेरिका का बदला रुख? फैक्ट शीट में संशोधन से उठे सवाल

व्हाइट हाउस ने भारत-US ट्रेड डील की फैक्टशीट में “कमिटमेंट” को “इरादा” में बदलकर समझौते की बाध्यता को नरम किया है। कृषि और डिजिटल टैक्स जैसे मुद्दों पर भी शब्दों में सावधानी बरती गई है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर व्हाइट हाउस की फैक्टशीट में बदलाव कर दिया गया है, जिसने सियासी और कारोबारी हलकों में हलचल मचा दी है। दस्तावेज जारी होने के महज एक दिन बाद ही उसकी अहम पंक्तियों में संशोधन कर दिया गया। पहले जहां लिखा था कि भारत 500 अरब डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए “कमिट” करता है, वहीं अब भाषा को नरम करते हुए इसे “खरीदने का इरादा रखता है” कर दिया गया है। शब्दों के इस छोटे से बदलाव ने समझौते की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्योंकि ‘कमिटमेंट’ और ‘इरादा’ के बीच का फर्क ही डील की गंभीरता तय करता है। अब इस बदलाव को अमेरिका का साइलेंट यू-टर्न माना जा रहा है, जिससे पूरे समझौते का स्वर थोड़ा नरम पड़ता नजर आ रहा है।

 फैक्टशीट में क्या था दावा?

भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित आपसी और फायदेमंद ट्रेड डील का ढांचा सामने आने के बाद व्हाइट हाउस ने मंगलवार को एक विस्तृत फैक्टशीट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई प्रकार के खाद्य व कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म करेगा या उनमें बड़ी कटौती करेगा। फैक्टशीट के शुरुआती वर्जन में साफ शब्दों में लिखा गया था कि “भारत ने ज्यादा अमेरिकी सामान खरीदने और 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, सूचना एवं संचार तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने का कमिटमेंट किया है।” इस भाषा ने संकेत दिया था कि समझौता मजबूत और ठोस प्रतिबद्धता पर आधारित है, लेकिन बाद में शब्दों में किए गए बदलाव ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

अब क्या बदला गया?

व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर जारी नए वर्जन में शब्दों का ऐसा बदलाव किया गया है, जिसने पूरी डील की धार को कुछ नरम कर दिया है। पहले जहां “कमिट” यानी पक्के वादे की बात थी, अब उसे बदलकर “इरादा” कर दिया गया है, जो बाध्यता की बजाय इच्छा को दर्शाता है। इतना ही नहीं, उत्पादों की सूची से “कृषि” शब्द भी हटा दिया गया है। पहले के दस्तावेज़ में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कई खाद्य व कृषि उत्पादों पर टैक्स खत्म या कम करेगा-जिनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड ज्वार, ड्राई फ्रूट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल थे। लेकिन नए वर्जन में “कुछ दालें” वाला हिस्सा भी गायब है। इन बदलावों ने संकेत दे दिया है कि समझौते की शर्तों को लेकर अब भाषा अधिक लचीली और सतर्क हो गई है।

डिजिटल टैक्स पर भी बदला रुख

ट्रेड डील की फैक्टशीट में डिजिटल टैक्स को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां साफ तौर पर लिखा था कि “भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा” और डिजिटल ट्रेड से जुड़ी रुकावटें खत्म करने के लिए मजबूत नियमों पर बातचीत करने का कमिटमेंट करेगा, वहीं नए वर्जन में यह भाषा पूरी तरह बदल गई है। अब डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने की बात गायब है और सिर्फ इतना कहा गया है कि “भारत मजबूत द्विपक्षीय डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए तैयार है।” यानी पहले जहां ठोस वादा दिख रहा था, अब वहां सिर्फ बातचीत की इच्छा जताई गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि डिजिटल मोर्चे पर भी समझौते की शर्तें पहले जितनी सख्त या तय नहीं रहीं।

दोनों देशों में क्या तय हुआ है?

पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम ट्रेड डील का खाका पेश किया, जिसका मकसद आपसी व्यापार को नई रफ्तार देना है। इस प्रस्ताव के तहत दोनों देश कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर सहमत हुए हैं। अमेरिका भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं बदले में भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य व कृषि सामानों पर टैक्स खत्म या काफी कम करेगा। इन उत्पादों में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए रेड ज्वार, ड्राई फ्रूट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे सामान शामिल हैं। कुल मिलाकर यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

500 अरब डॉलर की खरीद का प्लान

भारत और अमेरिका के साझा बयान में एक बड़ा लक्ष्य भी तय किया गया है। इसके मुताबिक, भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है। इस संभावित खरीद में ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी से जुड़े उपकरण और कोकिंग कोल जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं। अगर यह योजना तय रूप में आगे बढ़ती है, तो यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकती है और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकती है।

ट्रंप का बड़ा फैसला

ट्रेड डील फाइनल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बड़ी राहत देते हुए 25 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क हटा दिया है। यह अतिरिक्त टैक्स अगस्त में इसलिए लगाया गया था क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। ट्रंप ने कहा कि भारत ने इस मामले में “काफी बड़े कदम” उठाए हैं और नई दिल्ली ने सीधे या परोक्ष रूप से मॉस्को से तेल आयात रोकने का भरोसा दिया है। इस फैसले को दोनों देशों के रिश्तों में नरमी और रणनीतिक समझ की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।

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