नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है। वॉशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर युद्ध को रोका था। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस सैन्य टकराव में कुल 11 लड़ाकू जेट विमान मार गिराए गए। हालांकि, उनके दावों में यह संख्या हर बार बदलती रही है। भारत सरकार ने ट्रंप के इन बयानों को हमेशा की तरह खारिज कर दिया है और इसे वास्तविकता से परे बताया है। इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत-पाक मुद्दे पर चर्चा को तूल दे दिया है।
ट्रंप ने 80वीं बार दोहराया भारत-पाक मध्यस्थता दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कुछ महीनों में 80 से अधिक बार यह दावा किया है कि उन्होंने मई 2025 के भारत-पाक संघर्ष को रूकवाया। उनके बयान में गिरे जेट विमानों की संख्या समय के साथ बदलती रही है। शुरुआत में उन्होंने पांच विमान गिरने का दावा किया था, बाद में यह संख्या 7, 8, 10 और अब 11 तक पहुंच गई। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि किस देश के कितने विमान गिराए गए। कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “जब बहुत सारा पैसा डूबने की बात आई तो उन्हें लगा कि हमें नहीं लड़ना चाहिए। 11 जेट मार गिराए गए थे। वे बहुत महंगे जेट थे।”
उन्होंने केवल सैन्य ही नहीं बल्कि आर्थिक दबाव की भूमिका भी बताई। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने दोनों देशों के नेताओं को फोन कर चेतावनी दी थी कि यदि युद्ध नहीं रुका तो अमेरिका व्यापारिक संबंध समाप्त कर देगा। उन्होंने कहा “मैंने कहा कि अगर आप लोग इस मामले को नहीं सुलझाते तो मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा। और अचानक सब ठीक हो गया। मैंने कहा था कि अगर आप लड़ोगे तो मैं आपके देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा।” हालांकि भारत सरकार ने ट्रंप के सभी दावों का बार-बार खंडन किया है।
ट्रंप ने PM मोदी का भी किया जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी इस कार्यक्रम को देख रहे थे और उन्होंने उनसे बातचीत भी की। ट्रंप ने कहा, “मेरी प्रधानमंत्री मोदी से बात हुई है। वह उत्साहित हैं और अभी हमें देख रहे हैं।” हालांकि, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को लगातार खारिज किया है और कहा कि पाकिस्तान के साथ सभी मामले द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुए युद्धविराम को लेकर भारत ने पहले ही स्पष्ट जवाब दिया था। भारत ने कहा कि बाहरी दबाव या मध्यस्थता की वजह से नहीं बल्कि दोनों देशों के सैन्य महानिदेशकों (DGMOs) के सीधे संवाद के बाद युद्धविराम का फैसला लिया गया।





