नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को झटका दिया है। ट्रंप ने भारत को चीन और पाकिस्तान की कतार में खड़ा कर दिया। ट्रंप ने भारत को उन 23 देशों की सूची में शामिल किया है, जहां अवैध ड्रग्स का उत्पादन और तस्करी होती है। यह बयान दोनों देशों के रिश्तों में हलचल मचा सकता है।
ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि अवैध नशीली दवाओं और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की तस्करी से ये देश अमेरिका और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उनके इस बयान ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में सोमवार, 15 सितंबर 2025 को पेश प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 23 देशों की पहचान मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन और तस्करी में शामिल प्रमुख देशों के तौर पर की गई है, जिसमें भारत का नाम भी शामिल है।
इस लिस्ट में कौन-कौन देश शामिल?
ट्रंप ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि इस सूची में अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, म्यांमार, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, भारत, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं। अमेरिकी व्हाइट हाउस ने कहा कि, राष्ट्रपति ट्रंप ने संसद को उन प्रमुख देशों की लिस्ट सौंपी, जो अमेरिका में अवैध ड्रग्स की आपूर्ति और तस्करी के लिए जिम्मेदार हैं।
अफगानिस्तान समेत ये पांच देशों को लेकर कहीं ये बात
अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि ‘प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन’ में शामिल 23 देशों में से अफगानिस्तान, बोलीविया, म्यांमार, कोलंबिया और वेनेजुएला को ऐसे देशों की श्रेणी में रखा गया है, जो मादक पदार्थों के खिलाफ पर्याप्त प्रयास करने में नाकाम रहे हैं। इनसे सख्त कार्रवाई और सुधार की मांग की गई है।
विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि, इस सूची में किसी देश का शामिल होना जरूरी नहीं कि उसकी सरकार के मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों या अमेरिका के साथ सहयोग के स्तर को दर्शाता हो। यानी नाम आने के बावजूद यह देशों की नीतियों और साझेदारी पर सवाल खड़ा नहीं करता।
चीन को लेकर क्या कहा गया?
‘प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन’ में ट्रंप ने चीन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि फेंटेनाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स का सबसे बड़ा स्रोत दुनिया में चीन ही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन नाइटाजेन और मेथामफेटामाइन समेत कई नशीली दवाओं की वैश्विक महामारी को बढ़ावा देने वाले प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।





