नई दिल्ली//रफ्तार डेस्क। म्यांमार और थाइलैंड में शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद अब चारों तरफ तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। टूटी सड़कें और ढही इमारतों की तस्वीरें भयावह हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को लगातार मलबे में से लाशें मिल रहीं हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार अब तक अधिकारिक रूप से 694 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं हजारों की संख्या में लोग घायल हैं म्यांमार की सेना ने छह राज्यों में आपातकाल घोषित कर दिया है।
बैंकॉक तक भारी तबाही मचाई है
गौरतलब है कि म्यांमार के सागाइंग से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में आये इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.7 आंकी गयी। इसके झटके थाईलैंड सहित पांच पड़ोसी देशों बंगलादेश, भारत, लाओस, चीन और थाईलैंड में भी महसूस किये गये। इस भूकंप ने म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र से लेकर थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक तक भारी तबाही मचाई है।
मांडले शहर का ऐतिहासिक एवा ब्रिज ढहा
इस विनाशकारी भूकंप ने मंडाले, नेपिटॉ, यांगून और दूसरे शहरों में तबाही मचाई है। मांडले शहर में इरावडी नदी पर बना ऐतिहासिक एवा ब्रिज ढह गया, जो स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी था। राजधानी नेपिडो की सड़कों पर दरारें पड़ गईं, और कई इमारतें जमींदोज हो गईं। एक मस्जिद के ढहने से 20 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है।
सोशल मीडिया पर तबाही की तस्वीरें वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मांडले के मंदिरों और बौद्ध स्थलों के ढहने की तस्वीरें वायरल हुई हैं। एक स्थानीय नागरिक ने लिखा कि हम पढ़ रहे थे, तभी जमीन हिलने लगी। कुछ ही सेकंड में सब कुछ धूल में मिल गया।
खून की कमी के कारण मरीजों के इलाज में दिक्कत
म्यांमार में जहां 732 से ज्यादा लोग घायल हैं तो वहीं थाइलैंड में भी सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। यहां अस्पतालों में खून की भारी कमी के कारण डॉक्टरों को मरीजों के इलाज में दिक्कत हो रही है। म्यांमार सरकार ने कहा कि प्रभावित इलाकों में रक्तदान की भारी जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल राहत कार्यों के लिए 5 मिलियन डॉलर जारी किए हैं।
भारत हरसंभव सहायता के लिए तैयार
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री और मेडिकल टीम के साथ तैयार है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “म्यांमार और थाइलैंड में भूकंप से उत्पन्न स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हरसंभव सहायता के लिए तैयार है।”
अमेरिका ने भी दिया मदद का भरोसा
इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी के म्यांमार निदेशक मोहम्मद रियास ने कहा, “हमें अंदाजा भी नहीं कि वास्तविक तबाही कितनी भयावह है।” सरकार ने राहत कार्यों में विदेशी सहायता स्वीकार करने की बात कही है और अमेरिका ने मदद का भरोसा दिया है। लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी सहायता में की गई कटौती के कारण यह देखना होगा कि अमेरिका किस हद तक मदद कर पाता है।





