संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि सीरियाई नागरिकों को 11 वर्षों से जारी बर्बर लड़ाई की भीषण क़ीमत चुकानी पड़ी है और लाखों लोगों के मानवाधिकारों का व्यापक पैमाने पर उल्लंघन हुआ है. यूएन प्रमुख ने शान्ति का रास्ता चुने जाने का आहवान करते हुए सचेत किया है कि सीरियाई लोगों की उम्मीदों पर नाकाम नहीं हुआ जा सकता. महासचिव गुटेरेश ने सीरिया में हिंसक संघर्ष की त्रासदीपूर्ण 11वीं वर्षगाँठ पर शुक्रवार को अपना एक वक्तव्य जारी किया है. उन्होंने कहा, “सीरियाई नागरिकों ने जिस बर्बादी को सहा है, वह इतनी विस्तृत व घातक है कि आधुनिक इतिहास में ऐसा कम ही देखने को मिला है.” 11 years of horrific war has devastated Syria and its people, exacting an unconscionable human cost. The conflict must cease. There must be no impunity. We cannot fail the Syrian people. — António Guterres (@antonioguterres) March 11, 2022 उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भ प्रकार की दण्डमुक्ति को रोका जाना होगा. महासचिव के मुताबिक़, वर्ष 2011 में गृहयुद्ध की शुरुआत से अब तक, देश भर में धीमी गति से बुनियादी ढाँचे का व्यवस्थित ढंग से विध्वंस हुआ है. उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व में स्थित देशों में जनविद्रोह के कथित ‘अरब वसन्त’ (Arab Spring) के बाद से देश में आर्थिक संकट गहराया है और मानवीय आवश्यकताएँ अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं. “लाखों घरेलू विस्थापित और शरणार्थी, बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने के लिये संघर्ष कर रहे हैं.” “हमें आशा नहीं छोड़नी होगी, हमें अभी कार्रवाई करनी होगी.” यूएन प्रमुख ने कहा कि शाब्दिक संकल्पों से परे जाकर, शान्ति के लिये साहस व संकल्प का परिचय देना होगा और वो सभी क़दम उठाने होंगे, जोकि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के अन्तर्गत बातचीत और राजनैतिक समाधान के लिये ज़रूरी हैं. महासचिव ने कहा कि इस प्रस्ताव में शान्ति प्रक्रिया के लिये नए संविधान की दिशा में एक रोडमैप प्रदान किया गया है. इसमें एक ऐसा समाधान भी है, जिससे सीरिया के सभी नागरिकों की आकाँक्षाओं को पूरा किया जा सके, शरणार्थियों की सुरक्षित व गरिमामय वापसी के लिये आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण किया जा सके. साथ ही, आतंकवादी ख़तरों से निपटा जाना होगा और सीरिया की सम्प्रभुता, क्षेत्रीयण अखण्डता व स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना होगा. “हमें देश भर में लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये व्यापक मानवीय राहत रास्तों की सुलभता सुनिश्चित करनी होगी.” बताया गया है कि सीमा-पार सामग्री को लाख़ों ज़रूरतमन्दों तक पहुँचाना ज़रूरी है. आरम्भिक पुनर्बहाली सहायता के ज़रिये सहनक्षमता निर्माण होता है, जबकि तात्कालिक जीवनरक्षक ज़रूरतों से निपटा जाता है. नैतिक व मानवीय अनिवार्यता यूएन प्रमुख ने सुरक्षा परिषद से प्रस्ताव 2285 की अवधि जुलाई में फिर बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि सीमा पार से मानवीय सहायता को जारी रखा जा सके. “यह एक नैतिक और मानवीय अनिवार्यता है.” यूएन प्रमुख ने सीरिया में मनमाने ढँग से लोगों को हिरासत में लिये जाने और जबरन गुमशुदगी के मामलों का अन्त करने के लिये, सामूहिक कार्रवाई की पुकार लगाई है. उन्होंने कहा कि यह समय परिवारों की उन पुकारों को सुनने का है, जो अपने गुमशुदा परिजनों के बारे में जानकारी की गुहार लगा रहे हैं. महासचिव ने बताया कि एक ओर परिवार अपने परिजनों के बारे में वास्तविकता जानना चाहते हैं, वहीं हज़ारों लोग अकल्पनीय परिस्थितियों में जेलों में रहने के लिये मजबूर हैं. “मेरा सन्देश स्पष्ट है, हम सीरियाई लोगों का साथ नहीं छोड़ सकते हैं.” “हिंसक संघर्ष को रोकना होगा. अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का आदर किया जाना होगा.” इस क्रम में, महासचिव ने सभी पक्षों से यूएन के तत्वाधान में राजनैतिक प्रक्रिया में अर्थपूर्ण ढँग से शामिल होने और मानवीय राहत प्रयासों का स्तर बढ़ाने के लिये समर्थन का आग्रह किया है. –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News




