नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार किया था जिसके बाद पूरे बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की बाढ़ सी आ गई थी। आज चिन्मय कृष्ण दास चटगांव की अदालत में जमानत के लिए पहुंचे थे। हालांकि कोर्ट ने उनको जमानत देने से इनकार कर दिया। बांग्लादेश के द डेली स्टार ने जानकारी दी कि 11 वकीलों की पैरवी के बाद भी उनको जमानत नहीं मिल सकी है। इससे पहले उनकी जमानत याचिका पर 3 दिसंबर को सुनवाई होनी थी लेकिन अभियोजन पक्ष ने समय मांगा और चिन्मय दास की तरफ से कोई वकील पेश न होने के चलते इस सुनवाई को स्थगित कर दिया था।
चिन्मय कृष्ण दास पर क्या आरोप है?
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में इस्कॉन से जुड़े हुए हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बांग्लादेश के राष्टीय ध्वज के ऊपर भगवा ध्वज फहराने का आरोप है जिसके चलते उनके खिलाफ न सिर्फ विरोध प्रदर्शन हुआ बल्कि उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला भी दर्ज कर लिया गया। इस घटना के बाद वह 25 नवंबर को ढाका के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे थे तो वहां से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थको नें उनके समर्थन में विरोध करना शुरु कर दिया था जिसमें एक वकील को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया था।
अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी
डेली स्टार के मुताबिक चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर तकरीबन 30 मिनट बहस हुई। जज ने दोनों पक्षों को सुना जिसके बाद फैसला सुनाते हुए उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि हम एन्जीबी ओक्या परिषद के बैनर तले चटगांव आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट और चटगांव बार एसोसिएशन का सदस्य हूं. ऐसें में मुझे केस को आगे बढ़ाने के लिए किसी स्थानीय वकील की मुहर की जरूरत नहीं है।” अब यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है जहां से जमानत का फैसला होना है।





