नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ ही घंटों में भारत पहुंचने वाले हैं। यह दौरा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है। पुतिन 4 दिसंबर की शाम भारत आएंगे और 5 दिसंबर को उनके मुख्य कार्यक्रम होंगे। यह यूक्रेन युद्ध के बाद उनका पहला भारत दौरा भी है, इसलिए इसे बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
RELOS और SU-57 पर रहेगा सबसे बड़ा फोकस, भारत बनेगा और ‘शक्तिमान’
पुतिन के इस दौरे में सबसे बड़ा फोकस रक्षा समझौतों पर रहेगा. इसमें सबसे अहम है RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) डील, जिसके तहत भारत और रूस की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और सप्लाई बेस का इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके साथ ही रूस भारत को अपना अत्याधुनिक SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने की तैयारी में है. भविष्य में S-500 मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल का अपग्रेड वर्जन, हाइपरसोनिक हथियार और नए वॉरशिप बनाने पर भी बातचीत होगी।
2030 तक की इकोनॉमिक साझेदारी का रोडमैप तय होगा
इस दौरे में एक बड़ा डिलिवरेबल होगा 2030 तक भारत-रूस इकोनॉमिक कोऑपरेशन का स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम. इसके तहत कई सेक्टोरल एग्रीमेंट्स किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं। ट्रेड, एनर्जी, एग्रीकल्चर, हेल्थ, मीडिया, ऑयल सेक्टर, सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन रूसी डिप्लोमेट उशाकोव के मुताबिक, 2024 में भारत-रूस का व्यापार 12% बढ़कर 63.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूस ने ट्रेड असंतुलन को दूर करने और बाहरी दबाव से बचाव के लिए एक नया आर्थिक तंत्र भी प्रस्तावित किया है।
पुतिन के साथ भारत आ रहे हैं ये 7 बड़े रूसी मंत्री
पुतिन के साथ रूस के 7 बड़े मंत्री भी भारत दौरे पर आ रहे हैं। आंद्रेई बेलोउसॉव – रक्षा मंत्री, एंतोन सिलुआनोव – वित्त मंत्री, ऑक्सान लूत – कृषि मंत्री, मैक्सिम रेशेत्निकोव – आर्थिक विकास मंत्री, मिखाइल मुराश्को – स्वास्थ्य मंत्री, ब्लादिमी कोलोकॉल्तसेव – गृह मंत्री, आंद्रेई निकितन – परिवहन मंत्री इन मंत्रियों की मौजूदगी से साफ है कि यह दौरा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है।





