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पाकिस्तान : अनुच्छेद 63ए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पीएमएल-एन सरकार को झटका

इस्लामाबाद, 18 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में संविधान के अनुच्छेद 63ए की व्याख्या पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले कि पार्टी बदलने वाले सांसद द्वारा डाले गए वोट को बजट के निर्णायक मतदान और अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में नहीं गिना जाएगा, शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। अब देश के सबसे बड़े प्रांत पंजाब में मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर एक राजनीतिक संकट फिर से उभर आया है, जो देश को आम चुनावों की ओर ले जा सकता है। इमरान खान जल्द चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं और सरकार विरोधी लंबा मार्च के जरिए इस्लामाबाद पर फिर से कब्जा करने के लिए कमर कस रहे हैं। पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 63ए की व्याख्या और राष्ट्रपति के एक संदर्भ पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया कि दलबदल करने वाले सांसदों द्वारा डाले गए वोटों की गणना नहीं की जाएगी। फैसले के मुताबिक, अनुच्छेद 63ए संसद के सदस्यों को पार्टी की नीति का पालन करने के लिए बाध्य करता है, यही कारण है कि किसी भी सांसद का अपने स्वयं के राजनीतिक दल के खिलाफ वोट, मतगणना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होगा। इस फैसले को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता इमरान खान के लिए एक बड़ी उपलब्धि और शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चिंताजनक माना जा रहा है, क्योंकि शरीफ के बेटे हमजा शहबाज शरीफ को दलबदलुओं के समर्थन से पंजाब प्रांत का मुख्यमंत्री चुना गया है। दलबदल करने वाले पीटीआई के कम से कम 25 सदस्यों की किस्मत अब अधर में लटकी हुई है। इस फैसले ने देश के सबसे बड़े प्रांत को राजनीतिक संकट में डाल दिया है। वरिष्ठ वकील सलमान अकरम राजा ने कहा, अगर ईसीपी (पाकिस्तान का चुनाव आयोग) 25 असंतुष्ट पीटीआई सांसदों को हटाने का फैसला करता है, तो इसका परिणाम अनुच्छेद 130 (4) के प्रावधान के अनुसार सीएम के लिए दूसरे दौर का चुनाव होगा और जो भी दल बहुमत से जीतेगा, वह सरकार बनाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संकेत मिलता है कि हमजा शहबाज को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना होगा और चूंकि असंतुष्ट सदस्य हमजा शहबाज के पक्ष में मतदान नहीं कर पाएंगे, इसलिए यह पंजाब विधानसभा में उनके समर्थन को कम कर देगा, जिससे उनके मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने की संभावना कम हो जाएगी। एक अन्य कानूनी विशेषज्ञ ने कहा, राष्ट्रपति के संदर्भ में उठाए गए सवालों को एक तब प्रभावी होगा, जब संसदीय दल के निर्देश की अवहेलना की गई हो। दूसरा दृष्टिकोण है कि यह सुप्रीम कोर्ट की सलाह थी और इसे फैसले के रूप में नहीं लिया जा सकता। पीएमएल-एन के डिप्टी स्पीकर अट्टा तरार ने कहा, दलबदल के मामले पर फैसला अब पाकिस्तान का चुनाव आयोग (ईसीपी) करेगा। --आईएएनएस एसजीके/एएनएम

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