नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हाल ही में पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध बिगड़ते जा रहे हैं। यह मामला उस समय गर्मा गया जब तहरीक ए तालिबान ने मकीन इलाके में पाकिस्तानी सेना के 30 जवानों को मौत के घाट उतार दिया गया था। टीटीपी की इस कार्यवाई से पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया। तहरीक ए तालिबान पर पलटवार करते हुए पाकिस्तान ने एयरस्ट्राइक करने अपने बदला लेने के इरादों को जगजाहिर कर दिया। यह हालात अब और संगीन होते जा रहे है। एक ओर तालिबान के लड़ाके बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी पेशावर और क्वेटा में अपने सैनिकों की तैनाती कर दी है।
आमने सामने आ सकती हैं दोनों देश की सेनाएं
पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक के बाद दोनो देशों के संबध तनावपूर्ण हो गए हैं। तालिबान ने बदले की भावना से 15 हजार लड़ाकों को पाकिस्तान की ओर बढ़ने के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों का दावा है पाकिस्तान की सैन्य टुकडियां भी किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सीमा पर पहुंच गई हैं। दोनों देशों मे से किसी एक ने भी हमले की पहल की तो संभव है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष की स्थिति बन जाए।
हालांकि अगर दोनो देशों के बीच टकराव होता है तो तालिबान का मुकबला करने के लिए पाकिस्तान के पास न तो सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक रूप से सक्षम है। तालिबान की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लंबे समय से अफगानिस्तान में बैठी रूसी और अमेरिकी सेना को वापस भेजने पर मजबूर कर दिया। इसी खतरे को भांपते हुए पाकिस्तान ने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है।
तालिबान के पास हथियारों का जखीरा मौजूद है जिसमें एके-47, मोर्टार रॉकेट लॉन्चर जैसे मॉडर्न हथियार हैं जबकि पाकिस्तान के पास सीमित मात्रा में हथियार हैं। इसके अलावा आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को हथियारों की खरीददारी में भी मुश्किलें कम नहीं हैं।





