नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर तनाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। Israel और United States द्वारा Iran के ठिकानों पर की गई कथित सैन्य कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बदले हैं। इजरायल ने इसे “प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक” बताया है, जबकि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। तेहरान, इस्फहान और अन्य शहरों में धमाकों की खबरों के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है-अगर टकराव लंबा चला तो सैन्य ताकत में कौन भारी पड़ेगा?
सैनिक संख्या: ईरान आगे, लेकिन तस्वीर पूरी नहीं
संख्या के लिहाज से ईरान के पास बढ़त दिखाई देती है। अनुमानतः उसके पास करीब 6 लाख सक्रिय सैनिक और लगभग 3 लाख से अधिक रिजर्व बल है। वहीं इजरायल के पास लगभग 1.7 लाख सक्रिय सैनिक हैं, लेकिन उसकी रिजर्व फोर्स 4 लाख से ज्यादा प्रशिक्षित जवानों की मानी जाती है, जिन्हें तुरंत तैनात किया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संख्या से ज्यादा अहम है प्रशिक्षण, समन्वय और युद्ध का अनुभव-और इस मोर्चे पर इजरायल की सेना अत्यधिक तकनीकी और संगठित मानी जाती है।
वायु शक्ति: इजरायल की तकनीकी बढ़त
हवाई ताकत के मामले में इजरायल को स्पष्ट बढ़त हासिल है। उसके पास 600 से अधिक आधुनिक विमान हैं, जिनमें F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट शामिल हैं। ये अत्याधुनिक रडार से बचने और सटीक हमले की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर ईरान के पास लगभग 500 के आसपास विमान हैं, लेकिन उनमें से कई पुराने मॉडल के हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण उनके अपग्रेड में कठिनाई रही है। ऐसे में सीधे हवाई मुकाबले की स्थिति में इजरायल मजबूत स्थिति में दिखता है।
मिसाइल ताकत: ईरान की क्षमता अधिक
जहां वायुसेना में इजरायल आगे है, वहीं मिसाइल क्षमता में ईरान को बड़ी ताकत माना जाता है। उसके पास हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं, जो क्षेत्रीय स्तर पर खतरा पैदा कर सकती हैं। इजरायल की मिसाइल संख्या कम भले हो, लेकिन तकनीक अत्याधुनिक है। उसका मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर Iron Dome, कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए जाना जाता है।
रक्षा बजट: बड़ा अंतर
रक्षा खर्च के मामले में इजरायल स्पष्ट रूप से आगे है। हालिया वर्षों में उसका वार्षिक रक्षा बजट 45 अरब डॉलर से अधिक रहा है और उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है। ईरान का बजट इससे काफी कम है और वह अपेक्षाकृत कम लागत वाली रणनीतियों-जैसे ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम-पर ज्यादा ध्यान देता है।
जंग का गणित सीधा नहीं
सैन्य ताकत का आकलन केवल संख्या या हथियारों से नहीं किया जा सकता। भू-राजनीतिक समर्थन, साइबर क्षमता, खुफिया नेटवर्क और क्षेत्रीय गठबंधन भी अहम भूमिका निभाते हैं। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।





