नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के Kharg Island पर जोरदार बमबारी की है। ट्रंप के अनुसार इस हमले में द्वीप पर मौजूद कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक को अंजाम दिया है।
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल उन्होंने इस द्वीप पर मौजूद तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने का फैसला नहीं किया है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के रास्ते में कोई रुकावट पैदा की गई तो अमेरिका अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका किसी भी अहम ठिकाने पर हमला करने की क्षमता रखता है।
कहां स्थित है खर्ग आईलैंड
खर्ग आईलैंड Persian Gulf में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण द्वीप है। यह ईरान के Bushehr बंदरगाह से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में और ईरानी मुख्य भूमि से करीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस द्वीप की लंबाई करीब 8 किलोमीटर और चौड़ाई 4 से 5 किलोमीटर है। चारों ओर गहरे समुद्र होने के कारण यह प्राकृतिक रूप से सुरक्षित माना जाता है।
क्यों कहा जाता है ईरान का दिल
खर्ग आईलैंड को ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का “दिल” कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ईरान का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से जहाजों के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है। इस द्वीप पर बड़े तेल टर्मिनल और स्टोरेज फैसिलिटी मौजूद हैं, जो ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
पहली बार बनाया गया निशाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में पहले भी कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स और परमाणु सुविधाओं पर हमले किए गए हैं। लेकिन खर्ग आईलैंड को पहले कभी सीधे निशाना नहीं बनाया गया था। इस बार पहली बार इस अहम द्वीप पर हमले का दावा सामने आया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खर्ग आईलैंड के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है तो ईरान के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। वहीं ईरान की सेना और Islamic Revolutionary Guard Corps ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया तो वह क्षेत्र में तेल और गैस से जुड़े ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।





