नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । इजरायल ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। ड्रोन और मिसाइलों की मदद से किए गए इस हमले में ईरान के दो प्रमुख परमाणु ठिकानों समेत कई सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। इजरायली वायुसेना (IAF) ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत यह हमला किया, जिसे 2025 की सबसे बड़ी और सबसे सटीक सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में नतांज स्थित परमाणु सुविधा, बैलिस्टिक मिसाइल विकास केंद्र और कुछ प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों को लक्ष्य बनाया गया।
तेहरान में कई जोरदार धमाकों की खबर है, जिसके बाद वहां आपातकाल घोषित कर दिया गया है। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली गुल है और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा, “यह कार्रवाई हमारे अस्तित्व की रक्षा के लिए आवश्यक थी। ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमारे लिए सीधा खतरा है, और जब तक यह खतरा समाप्त नहीं होता, यह अभियान जारी रहेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन राइजिंग लायन एक टारगेटेड और रणनीतिक मिशन है, जिसका उद्देश्य केवल उन ठिकानों को तबाह करना है जो इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
ईरान पर इजरायल का लक्षित हमला
इजरायल ने ईरान के खिलाफ एकतरफा और पूर्व-आक्रामक सैन्य अभियान को अंजाम देते हुए इसे “Targeted Defensive Campaign” नाम दिया है। इजरायली सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई जरूरी थी क्योंकि ईरान अब तक के सबसे करीब अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को ले आया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को “रक्षा के लिए जरूरी कदम” करार देते हुए कहा, “ईरानी शासन के हाथों में परमाणु हथियार न केवल इजरायल बल्कि पूरी दुनिया के लिए अस्तित्वगत खतरा हैं। हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।” वहीं ईरान ने भी हमले की पुष्टि की है।
ईरान-इजरायल टकराव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरान पर इजरायल के लक्षित सैन्य हमले के बाद अब अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा कि इजरायल ने इस कार्रवाई से पहले अमेरिका को सूचित किया था और बताया था कि यह हमला आत्मरक्षा के तहत किया जा रहा है। रुबियो ने स्पष्ट किया, “हम इस ऑपरेशन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं। हमारी प्राथमिकता क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा है। हम ईरान से अपील करते हैं कि वह किसी भी सूरत में अमेरिकी कर्मियों को निशाना न बनाए।” यह पहला मौका है जब अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से खुद को इजरायली ऑपरेशन से अलग करते हुए बयान जारी किया है। हालांकि, बयान में यह भी संकेत दिए गए कि अमेरिका रणनीतिक स्तर पर इजरायल के साथ है, लेकिन इस विशेष अभियान में उसकी कोई सैन्य भागीदारी नहीं रही।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
इजरायल के हमले पर ईरान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए पुष्टि की है कि उसके दो परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया है। ईरानी रक्षा मंत्रालय ने इस सैन्य कार्रवाई को एक “आक्रामक और उकसाने वाला कदम” करार दिया है। मंत्रालय ने दावा किया कि हमलों को आंशिक रूप से विफल कर दिया गया और अब देश व्यापक जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि इजरायली सैन्य अभियान के दौरान दो प्रमुख परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया है।





