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Monday, March 23, 2026
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IPCC रिपोर्ट: जलवायु परिवर्तन पर नाकाम वैश्विक नेतृत्व की एक बानगी

संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों ने, पृथ्वी और तमाम दुनिया पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में, सोमवार को एक तीखी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पारिस्थितिकी विघटन, प्रजातियों के विलुप्तिकरण, जानलेवा गर्मियाँ और बाढ़ें, ऐसे जलवायु ख़तरें हैं जिनका सामना दुनिया, वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण, अगले दो दशकों तक करेगी. अन्तरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) के मुखिया होसंग ली का कहना है, “ये रिपोर्ट कार्रवाई नहीं करने के परिणामों के बारे में एक स्पष्ट व ख़तरनाक चेतावनी है.” उन्होंने कहा, “रिपोर्ट दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन हमारे रहन-सहन और एक स्वस्थ पृथ्वी के वजूद के लिये एक गम्भीर व लगातार बढ़ता ख़तरा है.” “हमारी आज की कार्रवाइयों से, ये आकार मिलेगा कि लोग, बढ़ते जलवायु जोखिमों के लिये किस तरह अनुकूलन करते हैं और प्रकृति उनका किस तरह सामना करती है.” रिपोर्ट के अनुसार, मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन से, प्रकृति में ख़तरनाक और व्यापक बाधा उत्पन्न हो रही है और, जोखिम कम करने के प्रयासों के बावजूद, दुनिया भर में अरबों लोगों की ज़िन्दगी प्रभावित हो रही है और ऐसे लोग व पारिस्थितिकियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं जो सामना कर पाने में कम समर्थ हैं. संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों की तरफ़ से जारी होने वाली रिपोर्ट्स की श्रंखला में यह दूसरी रिपोर्ट है और ग्लासगो जलवायु सम्मेलन – कॉप26 के बाद केवल 100 दिनों में जारी हुई है. ध्यान रहे कि कॉप26 में, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने और जलवायु परिवर्तन के सबसे ख़तरनाक प्रभावों को रोकने के कार्रवाई तेज़ करने पर सहमति हुई थी. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अगस्त 2021 में जारी प्रथम रिपोर्ट को, “मानवता के लिये एक रैड कोर्ड” क़रार दिया था और कहा था कि “अगर हम अभी अपनी शक्तियाँ एकजुट कर लें तो, हम जलवायु त्रासदी का रुख़ पलट सकते हैं.” ‘जलवायु परिवर्तन की मार’ © WMO/Kompas/Hendra A Setyawan इण्डोनेशिया के जकार्ता में, एक महिला बाढ़ के दौरान अपनी बेटी के साथ रास्ता तय करते हुए इस ताज़ा रिपोर्ट पर भी यूएन प्रमुख का नज़रिया, उतना ही स्पष्ट व कड़ा है: उन्होंने ध्यान दिलाया है कि आईपीसीसी ने जो सबूत दिये हैं, वैसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखे हैं, इन सबूतों को उन्होंने, “मानव तकलीफ़ों की एक ऐटलस और नाकाम जलवायु नेतृत्व की मिलीभगत” क़रार दिया है. यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, अनुकूलन और नाज़ुक परिस्तितियों पर, अनगिनत सबूतों के साथ, ध्यान केन्द्रित करती है, और बताती है कि किस तरह लोग, और पृथ्वी, जलवायु परिवर्तन की चोटों का सामना कर रहे हैं. यूएन प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा है, “तमाम इनसानों की लगभग आधी संख्या, इस समय ख़तरनाक क्षेत्रों में रह रही है. बहुत सी पारिस्थितिकी प्रणालियाँ ऐसे मुक़ाम पर पहुँच चुकी हैं जहाँ से अब, नुक़सानों को पलटना असम्भव है. बेलगाम कार्बन प्रदूषण, दुनिया की नाज़ुक हालात में रहने वाली आबादी को धीरे-धीरे विनाश की तरफ़ धकेल रहा है.” –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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