नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पाकिस्तान की अदालत ने भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला तोशाखाना-II करप्शन केस से जुड़ा है। मामले में आरोप है कि इमरान खान ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा दिए गए बहुमूल्य बुल्गारी ज्वेलरी सेट की खरीद में नियमों का उल्लंघन किया और सरकारी विश्वास के साथ धोखाधड़ी की। जांच में पता चला कि गहनों की वास्तविक कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी, लेकिन इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीदा गया। अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई और यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों में बन गया।
तोशाखाना-II मामले का अहमियत
तोशाखाना-II मामला पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के मामलों में बेहद संवेदनशील माना जाता है। अदालत के अनुसार, इमरान और बुशरा की गतिविधियां सरकारी नियमों और नैतिकता के खिलाफ थीं। फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने इस केस में जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ज्वेलरी सेट की कीमत को कम दिखाकर नियमों की खुलेआम अवहेलना की गई। अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया और दोनों को कठोर सजा सुनाई, जिससे यह केस देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
अदियाला जेल में सुनाया गया फैसला
फैसला अदियाला जेल में विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने सुनाया। इमरान खान अगस्त 2023 से विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं। इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा दी जा चुकी थी। तोशाखाना-I मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी। अब तोशाखाना-II फैसले के बाद उनकी कानूनी टीम उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
उच्च न्यायालय में चुनौती और आगे की कार्रवाई
इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे तोशाखाना-II मामले के इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इस मामले के चलते पाकिस्तान की राजनीति और मीडिया में व्यापक हलचल मची हुई है। सजा के बाद देश में राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष की टिप्पणियां लगातार सामने आ रही हैं। इस फैसले से इमरान खान और बुशरा बीबी की राजनीतिक छवि पर असर पड़ने की संभावना है।
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