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Monday, March 23, 2026
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शान्तिपूर्ण, टिकाऊ दुनिया के लिये लैंगिक समानता ‘मौलिक पूर्वापेक्षा’

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने लैंगिक समानता के मुद्दे पर आयोजित एक टाउन हॉल बैठक में कहा है कि लैंगिक समानता अनिवार्य रूप से "शक्ति का प्रश्न" है, जो सहस्राब्दियों से, अधिकतर पुरुषों के हाथों में रहा है, और "सभी का नुक़सान करता रहा है." महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को, महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) के 66वें सत्र के एक कार्यक्रम के दौरान एक वक्तव्य में कहा, "आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं – कोविड-19 महामारी, जलवायु संकट, संघर्षों का विकास और प्रसार – वो मोटे तौर पर पर हमारी पुरुष-प्रधान दुनिया और पुरुष-प्रधान संस्कृति का परिणाम है." We are live with @antonioguterres for the #SGTownhall from the @UN #SDGs studio – join us: https://t.co/aFnEthelf8#CSW66 pic.twitter.com/LGibBlVCdY — Sima Bahous (@unwomenchief) March 16, 2022 उन्होंने कहा कि विश्व शान्ति की "ख़तरनाक स्थिति" को "पितृसत्ता की सहस्राब्दी और महिलाओं की आवाज़ों के दमन" से अलग करके नहीं देखा जा सकता है. इसका हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता और समता "सभी के लिये एक सुरक्षित, अधिक शान्तिपूर्ण, अधिक टिकाऊ दुनिया बनाने के लिये “मौलिक पूर्वापेक्षा" है. पाँच परिवर्तनकारी क़दम संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने अपनी रिपोर्ट, ‘हमारा साझा एजेण्डा’ (Our Common Agenda) का उल्लेख किया, जो लैंगिक आधार पर भेदभाव करने वाले सभी क़ानूनों को निरस्त करने के साथ शुरुआत करते हुए, सत्ता समान रूप से साझा करने के लिये परिवर्तनकारी कार्यों की रूपरेखा तैयार करती है. दूसरा, उन्होंने कहा कि जहाँ आवश्यक हो, सभी क्षेत्रों और निर्णय लेने के स्तरों में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये विशेष उपाय और आरक्षण लागू किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक समावेश में निवेश करना और अवैतनिक देखभाल कार्य के मुद्दे को सम्बोधित करना एक और प्राथमिकता होनी चाहिये, और युवा महिलाओं की आवाज़ों और नेतृत्व पर भी ध्यान देना चाहिये. अन्त में, उन्होंने कहा कि हर देश में, महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त करने की योजनाएँ होनी चाहिये. उन्होंने कहा, "इसे आपातस्थिति माना जाना चाहिये – जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये क़ानूनों, नीतियों और राजनीतिक इच्छाशक्ति से समर्थित हो." "कुल मिलाकर, इन पाँच कार्यों में समाज को मौलिक रूप से बदलने और लैंगिक समानता वाली दुनिया बनाने की क्षमता है जिसकी हमें आवश्यकता है." व्यापक और परस्पर जुड़े संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बढ़ती आपात स्थितियों पर प्रकाश डाला – यूक्रेन में युद्ध से लेकर कई देशों में "अराजक तख़्तापलट और संघर्ष" तक. साथ ही, अन्तरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) की नवीनतम रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें महिलाओं और लड़कियों को असमान रूप से प्रभावित करने वाले "मानव पीड़ा के एक एटलस" के रूप में वर्णन किया गया है; और एक असमान कोविड पुनर्बहाली का भी ज़िक्र है जिससे महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्होंने कहा, "ये व्यापक और परस्पर जुड़े संकट हैं जो हम सभी को प्रभावित करते हैं – लेकिन समान रूप से नहीं." उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्थाओं के लड़खड़ाने के साथ, अधिक महिलाओं ने अपने रोज़गार खो दिए हैं, और महिलाओं व लड़कियों पर अवैतनिक देखभाल कार्यों का भार जारी है – जिसके "शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और अन्तर-पीढ़ीगत ग़रीबी के लिये गम्भीर परिणाम" होंगे. ‘साहसी महिलाएँ’ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि महिलाएँ, फ़िलहाल जारी, लिंग आधारित हिंसा आपातस्थिति के बावजूद, शान्ति, समानता, जलवायु कार्रवाई, टिकाऊ विकास और मानवाधिकारों की पैरोकारी और आवाज़ उठाना जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, "हर महाद्वीप पर साहसी महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं हैं, अपने अधिकारों, और अधिक शान्तिपूर्ण, समावेशी, टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के लिये के लिये लड़ रही हैं, जिससे हम सभी लाभान्वित होंगे." विकास में सबसे बड़ी चुनौती एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण नीतियों और कार्यक्रमों के सन्दर्भ में, CSW की थीम – लैंगिक समानता हासिल करना, "पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है." उन्होंने कहा, "यह हमारे युग की सबसे बड़ी चुनौती – टिकाऊ विकास है." उन्होंने समझाया कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के नुक़सान का तिगुना ग्रह संकट – "महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता पर प्रगति के लिये एक बड़ा ख़तरा बन गया है." "जलवायु संकट एक मानवाधिकार संकट है – और एक महिला अधिकार संकट भी," और जलवायु कार्रवाई में "महिला कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार रक्षकों और नागरिक समाज संगठनों में निवेश" शामिल होना ज़रूरी है. © UNSPLASH/Christina न्यूयॉर्क में विचार-विमर्श करती महिलाएँ. खाई को पाटना संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने का संकल्प लेते हुए कहा, हमारा साझा एजेण्डा "एक नारीवादी एजेण्डा है, जो पुरुषों और महिलाओं की समान शक्ति, भागीदारी और नेतृत्व पर आधारित है." उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट में किस तरह आज की मौजूदा सामाजिक आर्थिक ज़रूरतों; जलवायु और पर्यावरण संकट; डिजिटल क्रान्ति; व लैंगिक न्याय पर ध्यान दिया गया है जबकि ये सभी मुद्दे बहुत लम्बे समय से जारी हैं." संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने कहा, "हमारा साझा एजेण्डा … संयुक्त राष्ट्र को एक लैंगिक-समानता वाले संगठन के रूप में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने के लिये आवश्यक आन्तरिक सुधारों की सिफ़ारिश करता है." इस उद्देश्य के लिये, उन्होंने उप महासचिव से, पूरे संयुक्त राष्ट्र परिवार की लैंगिक संरचना की स्वतंत्र समीक्षा की निगरानी करने के लिये कहा है, "यह सुनिश्चित करने के लिये कि हम लैंगिक समानता पर काम करने के मक़सद के लिये उपयुक्त हैं." नागरिक संगठनों की आवाज़ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने एक आधिकारिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए नागरिक विचार-विमर्श के स्थानों में वैश्विक गिरावट पर चिन्ता जताई, जिसमें यह भी स्पष्ट हुआ कि दुनिया भर में सिर्फ़ तीन प्रतिशत लोग उन देशों में रहते हैं, जहाँ नागरिक समाज संगठन स्वतंत्रता में काम कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "नागरिक समाज संगठन, सरकारों और लोगों को जोड़ते हैं," उन्होंने उन्हें "मानव अधिकारों के लिये एक महत्वपूर्ण आवाज़" माना. "जब नागरिक समाज का गला घोंट दिया जाता है, तो हम सम्वाद के लिये एक आवश्यक मंच खो देते हैं – जो लोकतंत्र के लिये जीवनदायिनी के समान होता है." महासचिव ने, नागरिक स्थान के संरक्षण और विस्तार की वकालत करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे स्थान पर महिला अधिकार संगठन, युवा कार्यकर्ता और महिला पर्यावरण व मानवाधिकार रक्षक जन, अपनी सम्पूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने टाउन हॉल की बैठक में कहा, "मुझे अपने सहयोगी की तरह देखें." –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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