तकरीबन 6 महीने पहले वो अर्श पर थे। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था का सारा दारोमदार उनके ऊपर था। एक वक्त था जब उनके पास अमेरिका समर्थित छह बिलीयन का बजट आया था। लेकिन आज न तो उनके पास पैरों तले अपनी जमीन है और न ही सिर पर भरोसेमंद आसमान। मन क्लिक »-www.prabhasakshi.com




