diversity-and-inclusion-key-to-sustainable-workplaces-and-resumption
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विविधता व समावेशन, सहन-सक्षम कार्यस्थलों व पुनर्बहाली के लिये अहम 

विविधता और समावेशन के मुद्दे पर अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि हर चार में से एक, यानि 25 प्रतिशत कर्मचारी महसूस करते हैं कि उन्हें कार्यस्थलों पर पर्याप्त अहमियत नहीं दी जाती है. समानता, विविधता और समावेशन के ऊँचे स्तरों को अधिक नवाचार, उत्पादकता व समावेशन, प्रतिभाओं की भर्ती व उन्हें कार्यबल का हिस्सा बनाए रखने और कर्मचारियों के कल्याण से जोड़ कर देखा गया है. Diversity ➕ inclusion t work 🟰 📈 greater productivity 💡innovation 👷♂️👷♀️workforce well-being Yet too little is being done to promote them. 🆕 Check out our new report to learn more. https://t.co/SXpTotzNAJ — International Labour Organization (@ilo) April 6, 2022 यूएन श्रम एजेंसी में कामकाज व समानता की स्थिति के लिये विभाग में निदेशक मैनुएला टॉमेई ने बताया कि समानतापूर्ण, विविध व समावेशी कार्यस्थल, पुनर्बहाली और सुदृढ़ता की दिशा में आगे बढ़ने का एक अहम कारक है. 'Transforming Enterprises through Diversity and Inclusion' शीर्षक वाली रिपोर्ट बताती है कि कार्यस्थल पर समावेशन का एहसास, निजी पृष्ठभूमि, आयु, लिंग, जातीयता, नस्ल या धर्म के बजाय वरिष्ठता से जुड़े होने की सम्भावना अधिक होती है. इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 92 प्रतिशत वरिष्ठ कर्मचारियों का कहना है कि वे कार्यस्थलों पर समावेशित महसूस करते हैं. वे यह मानते हैं विविधता का सम्मान किया जाता है और उनके काम को अहमियत मिलती है. मगर, निचले स्तरों पर कार्यरत कर्मचारियों में यह आँकड़ा घटकर 76 प्रतिशत रह जाता है. निदेशक मैनुएला टॉमेई ने कहा, “यदि समावेशन केवल वरिष्ठ पदों पर लोगों द्वारा अनुभव किये जाने वाला एक विशेषधिकार बना रहा तो, उद्यमों के लिये... ठोस लाभ से वंचित रह जाने का जोखिम है.” मध्यम आकार वालीं या फिर विशाल, बहुराष्ट्रीय उद्यमों में कार्यबल में सकारात्मक एहसास होने की सम्भावना, लघु और राष्ट्रीय उद्यमों की तुलना में अधिक है. रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि कार्यस्थलों, व्यवसायों, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में कार्यस्थलों पर उच्च प्रदर्शन में विविधता और समावेशन की अहम भूमिका है. विविधता, समावेशन का आकलन रिपोर्ट के लिये सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले केवल आधे प्रतिभागियों का कहना था कि कार्यस्थलों की संस्कृति व रणनीति में विविधता और समावेशन को पर्याप्त ढँग से पहचान व संसाधन प्राप्त हो पाए हैं. महज़, एक तिहाई उद्यम ही फ़िलहाल समावेशन को मापते हैं, जबकि ऐसा किया जाना प्रगति के नज़रिये से अहम बताया गया है. समावेशन और विविधता पर अतीत में कराये गए अध्ययनों में विशाल आकार वालीं, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता रहा है, जिनमें से अधिकाँश पश्चिमी, उच्च-आय वाले देशों में हैं. यूएन एजेंसी की रिपोर्ट में निम्नतर-मध्य आय और उच्चतर-मध्य आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में सभी आकार के उद्यमों का आकलन किया गया है. इस क्रम में, कर्मचारियों, प्रबन्धकों और वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों के विविध समूह से जानकारी एकत्र की गई है. यह जानकारी आयु, लिंग, यौन रुझान, जातीय/नस्लीय/धार्मिक समूहों, विकलांगजन और एचआईवी की अवस्था में रह रहे व्यक्तियों – विविध पृष्ठभूमियों को परिलक्षित करती है. अल्पसंख्यक समूहों का प्रतिनिधित्व केवल एक चौथाई प्रतिभागियों ने बताया कि शीर्ष प्रबन्धन में महिलाओं की उपस्थिति 40 से 60 फ़ीसदी तक है, जबकि एक तिहाई के मुताबिक़, वरिष्ठ पदों पर कोई भी विकलांग व्यक्ति नहीं है. कुछ अल्पसंख्यक समूहों का कहना है कि समावेशित महसूस करने के उनके सकारात्मक अनुभव कम ही रहे हैं. इनमें से अधिकाँश कनिष्ठ स्तर पर हैं. निदेशक टॉमेई ने कहा, “कोविड-19 महामारी ने हमारी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में व्याप्त मौजूदा विषमताओं को उजागर और पैना किया है.” रूपान्तरकारी बदलाव के तौर-तरीक़े जुलाई और सितम्बर 2021 के दौरान, 75 देशों में 12 हज़ार से अधिक कर्मचारियों में दो तिहाई से अधिक ने माना कि वैश्विक महामारी की शुरुआत से अब तक कार्यस्थल विविधता और समावेशन पर ध्यान केंद्रित करने व कार्रवाई का स्तर बढ़ा है. उनका मानना है कि वैश्विक महामारी ने उनकी अपेक्षाएँ बढ़ा दी हैं कि नियोक्ताओं (employers) द्वारा विविधता व समावेशन को बढ़ावा देने के लिये और अधिक प्रयास किये जाना चाहिएं. © World Bank/Jonathan Ernst घाना की राजधानी अकरा में स्टॉक एक्सचेंज के कर्मचारी. रिपोर्ट बताती है कि उद्यमों द्वारा टिकाऊ व कायापलट कर देने वाले बदलावों को आकार देने के लिये यह ज़रूरी है कि विविधता व समावेशन को व्यावसायिक नज़र से अहम दर्शाया जाए, और नीतियों, क़ानूनी फ़्रेमवर्क और अन्य उपायों के ज़रिये मज़बूती प्रदान की जाए. यूएन श्रम एजेंसी के मुताबिक़, कर्मचारियों द्वारा यह महसूस किया जाना ज़रूरी है कि उनके काम को अहमियत दी जाती है, उनका सम्मान, निष्पक्ष बर्ताव होता है, समावेशी सांगठनिक संस्कृति है और समावेशी नेतृत्व है. विशेषज्ञों का मानना है कि विविधता व समावेशन में रूपान्तरकारी बदलाव के तौर-तरीक़ों के ज़रिये व्यवसायिक प्रदर्शन में भी अहम योगदान दिया जाना ज सकता है. सतत बदलाव के लिये प्रमुख सिद्धान्त: - विविधता व समावेशन, रणनीति व संस्कृति का एक हिस्सा और प्राथमिकता बनानी होगी - शीर्ष प्रबन्धन में विविधिता सुनिश्चित की जानी होगी - वरिष्ठ नेताओं, प्रबन्धकों और कर्मचारियों को उदाहरण स्थापित करने वालों के रूप में जवाबदेह बनना होगा - रोज़गार, भर्ती, मौजूदगी बरक़रार रखने और विकास, इन सभी प्रक्रियाओं में कार्रवाई की जानी होगी --संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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