back to top
27.4 C
New Delhi
Sunday, April 5, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

डिजिटलीकरण व नवाचार से टिकाऊ परिवहन साधनों को मिली मज़बूती

डिजिटलीकरण ने आवाजाही व गतिशीलता के लिये नवाचारी समाधानों को आकार दिया है और वाहन ख़रीदने के बजाय अब टैक्नॉलॉजी के ज़रिये उसकी सुलभता ज़्यादा अहम हो गई है. भारत में ‘ओला मोबिलिटी इन्स्टीट्यूट’ (Ola Mobility Institute) में शोध विभाग की प्रमुख, ऐश्वर्या रामन का कहना है कि पिछले एक दशक में स्मार्ट फ़ोन की सर्वत्र सुलभता और कम क़ीमत पर डेटा की उपलब्धता ने टिकाऊ परिवहन साधनों की सम्भावनाओं के नए द्वार खोले हैं. चीन की राजधानी बीजिंग में हाल ही में ‘टिकाऊ परिवहन’ के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र का दूसरा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें जलवायु कार्रवाई, आर्थिक प्रगति और टिकाऊ विकास में परिवहन तंत्रों के योगदान पर चर्चा हुई. इसी सम्मेलन के अवसर पर, यूएन न्यूज़ ने ‘ओला मोबिलिटी इन्स्टीट्यूट’ में शोध विभाग की प्रमुख, ऐश्वर्या रामन के साथ एक ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने परिवहन तंत्रों को टिकाऊ बनाने के लिये गतिशीलता नवाचारों (mobility innovations) और समाधानों के ज़रिये हो रही प्रगति पर चर्चा की. ऐश्वर्या रामन ने गतिशीलता के क्षेत्र में उभरते कुछ अहम नए प्रतिमानों (paradigms) का उल्लेख किया: इनमें साझा (Shared), सम्बद्ध (Connected), बिजली चालित (Electric), कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence/AI) और स्वायत्त (autonomous) परिवहन प्रमुख हैं. उन्होंने बताया कि भारत समेत दुनिया के अनेक देशों में निजी वाहनों के प्रतिव्यक्ति स्वामित्व का मौजूदा स्तर कम है, और इस वजह से आवाजाही के लिये साझा साधनों पर निर्भरता बहुत अधिक है. जैसे कि सार्वजनिक परिवहन, बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा या फिर बिना मोटर वाले परिवहन के अन्य विकल्प. ऐश्वर्या रामन के अनुसार, पिछले एक दशक में स्मार्ट फ़ोन की बहुतायत और कम क़ीमत पर डेटा की उपलब्धता से आवाजाही के लिये सम्भावनाओं के नए रास्ते बन रहे हैं. डिजिटलीकरण ने गतिशीलता के लिये नए प्रतिमानों को आकार दिया है, आवाजाही व परिवहन साधनों को विकसित करने में क्राँति आई है और इससे टिकाऊ परिवहन की दिशा में छलाँग लगाने में मदद मिल रही है. Unsplash/David von Diemar टेस्ला जैसी कार कम्पनियाँ वाहनों की कुशलता सुरक्षा व स्वचालन के लिये एआई का इस्तेमाल कर रही हैं. वाहनों के स्वरूप में बदलाव उन्होंने कहा कि वाहन चलाने (drive) में स्वामित्व का स्थान अब सवारी (ride) के स्वामित्व ने ले लिया है. यानी, कहीं आने-जाने के लिये, किसी कार या दुपहिया वाहन को ख़रीदना ज़रूरी होने के बजाय अब वाहनों की सुलभता, उन तक आसान पहुँच होना ज़्यादा अहम हो गया है. परिवहन के साझा साधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से मोटरचालित परिवहन की अनियंत्रित वृद्धि की रफ़्तार कम होती है और सार्वजनिक पारगमन की दिशा में रास्ता तैयार होता है. ऐश्वर्या रामन ने बताया कि मौजूदा समय में वाहनों को महज़ ईंधन चालित होने के बजाय, टैक्नॉलॉजी से परिपूर्ण और डिजिटली जुड़े हुए उपकरणों के रूप में देखा जाता है. कनेक्टेड मोबिलिटी से सुरक्षा बेहतर होती है और यात्रियों के लिये सवारी का अनुभव भी बदल जाता है. दक्ष ऊर्जा वाहनों को प्रोत्साहन ऐश्वर्या रामन के मुताबिक़ वाहनों की चार्जिंग करने वाले समाधान तेज़ी से विकसित हो रहे हैं, जिससे बिजली चालित परिवहन को अपनाने में मदद मिल रही है. इसके अलावा, बैटरी की क़ीमतों में भी गिरावट आई है, शून्य उत्सर्जन गतिशीलता के लिये माँग बढ़ रही है, और इन्हें सम्भव बनाने के लिये सामर्थ्यकारी नीतिगत माहौल भी है. कृत्रिम बुद्धिमता समाधानों के ज़रिये भी सड़क व यात्री सुरक्षा को बेहतर व भरोसेमन्द बनाने और गतिशीलता सेवाओं की दक्षता में बढ़ोत्तरी लाने में मदद मिली है. ऐश्वर्या रामन का मानना है कि स्वायत्त परिहवन का अर्थ, महज़ बग़ैर वाहन चालक की कार से कहीं बढ़कर है. सार्वजनिक परिवहन में भी इसकी अनेक अन्य सम्भावनाओं का सहारा लिया जा सकता है, जैसे कि दवाओं व वैक्सीन वितरित किया जाना, हवाई टैक्सी के रूप में इस्तेमाल जैसे उपाय, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ पहुँचेगा. ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट में शोध मामलों की प्रमुख ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग, पहले से परिवहन के लिये टिकाऊ साधनों पर निर्भर हैं. Unsplash/Alexander Popov परिवहन क्षेत्र, वायु प्रदूषण की बहुत बड़ी मात्रा के लिये ज़िम्मेदार है भारत में टिकाऊ परिवहन इसके तहत, सार्वजनिक परिवहन जैसे साझा साधनों का बहुतायत में इस्तेमाल तो किया ही जाता है, बिना मोटर चालित विकल्पों, जैसेकि साइकिल चलाने और पैदल चलना भी आम है. उन्होंने कहा कि आम लोगों द्वारा इन परिवहन साधनों पर अपनी निर्भरता जारी रखना अच्छी बात होगी. इसके समानान्तर, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र एक साथ मिलकर, परिवहन तंत्रों को ज़्यादा भरोसेमन्द और माँग के अनुरूप बना सकते हैं. इसके अतिरिक्त, आरम्भिक और अन्तिम गंतव्य (First and last mile) से सार्वजनिक परिवहन तंत्रों को जोड़ने के लिये भाड़े पर वाहनों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जैसे कि साइकिल रिक्शॉ, ऑटो रिक्शॉ, टैक्सीन, मिनी बस इत्यादि. इन विकल्पों को Intermediate Public Transport या पैरा ट्रान्ज़िट कहा जाता है. वाहन ख़रीदने की योजना बना रहे आम लोग, बिजली चालित वाहनों और दक्ष दहन ईंजन वाले वाहनों के विकल्प चुन सकते हैं, जिनसे स्वच्छ हवा, बेहतर स्वास्थ्य के लक्ष्यों को पाने में मदद मिलती है. साथ ही, ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों के बीच, ऐसे वाहनों की देखरेख में भी अपेक्षाकृत आसानी होगी, कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी, और नवीकरणीय ऊर्जा की माँग में वृद्धि होगी. ऐश्वर्या रामन का मानना है कि नागरिकों को अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से स्वच्छ एवँ दक्ष ऊर्जा चालित परिवहन उपायों को बढ़ावा व प्रोत्साहन दिये जाने का आग्रह करना होगा. एक ओर नीतिनिर्धारकों व नियामकों और दूसरी ओर उद्योगों व नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों के ज़रिये टिकाऊ परिवहन के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है. –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

RCB vs CSK Live Streaming: कब, कहां और कैसे देखें हाई-वोल्टेज मुकाबला, यहां जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज के दिन के डबल हेडर...

SRH vs LSG: हेड-टू-हेड में किसका दबदबा? आंकड़े देखकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में...

Company Secretary क्या होता है? जानें कैसे बनाएं इस फील्ड में करियर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। यह बात स्वभाविक है कि आज...

Kolkata Port सीट पर कड़ा मुकाबला: TMC, BJP, कांग्रेस और वाम के बीच चौतरफा लड़ाई

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता...

रविवार का व्रत क्यों होता हैं खास, जानिए महत्त्व और व्रत विधि

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। रविवार का दिन सूर्य देव...

चेहरे पर पड़े चेचक के दाग से हैं परेशान, अब घर पर ही कर सकेंगी इसका इलाज

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज के समय में हर...

Ravivar Mantra: रविवार को इस प्रकार करें सूर्य देव की पूजा अर्चना, इन मंत्रों का भी करें जाप

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। सूर्य भगवान की पूजा अर्चना...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵