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Tuesday, March 24, 2026
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बारूदी सुरंगों से हताहतों की संख्या बढ़ी, सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान सर्वाधिक प्रभावित

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक सिविल सोसायटी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में, इनसान विरोधी बारूदी सुरंगों (Landmines) के फटने के कारण, वर्ष 2020 में, असाधारण रूप से बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए. बुधवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बारूदी सुरंगों से सर्वाधिक प्रभावित स्थानों में सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान प्रमुख हैं. ‘लैण्डमाइन्स मॉनीटर 2021’ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 के दौरान, बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर हताहत होने वाले लोगों की संख्या में, उससे पिछले 12 महीनों की तुलना में, 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ. इसके लिये, सशस्त्र संघर्षों में वृद्धि और बहुत सी ज़मीनों में संवर्धित बारूदी सुरंगें बिछी होना, ज़िम्मेदार बताया गया है. पीड़ित 50 से भी अधिक देशों में रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 के दौरान, 54 देशों और अन्य इलाक़ों में, कुल मिलाकर सात हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हुई. म्याँमार अकेला ऐसा देश था जहाँ ये पुष्टि हुई कि वहाँ बारूदी सुरंगों का हथियारों के रूप में पिछले 16 महीनों के दौरान इस्तेमाल किया गया, जैसाकि वहाँ पहले से भी होता रहा है, जबसे 1999 में इन घटनाओं की निगरानी व रिपोर्टिंग शुरू हुई. ICBL/Sean Sutton इराक़ के सिन्जार पहाड़ी इलाक़े में बारूदी सुरंगें हटाए जाने का काम. दर्जन भर अन्य देशों में भी बारूदी सुरंगों का प्रयोग हथियारों के तौर पर हुआ जिनमें कैमरून, मिस्र, निजेर, फ़िलिपीन्स, थाईलैण्ड, ट्यूनीशिया और वेनेज़ुएला प्रमुख हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 के दौरान, नागोर्नो कराबाख़ और आसपास के ज़िलों में भी बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किये जाने के मज़बूत संकेत मिले हैं. लैण्डमाइन मॉनीटर के एक प्रमुख सम्पादक मार्क हिज़नेय ने बताया, “हमारे सामने समस्या ये थी कि हमें ये मालूम नहीं था कि प्रभावित क्षेत्रों में किस तरह की बारूदी सुरंग थीं, बारूदी सुरंगें क्या संघर्ष के दौरान बिछाई गई थीं, या फिर युद्ध विराम और शान्ति स्थापना के बाद बारूदी सुरंगों का प्रयोग किया गया.“ उन्होंने कहा कि सम्बद्ध पक्षों ने, जानकारी व सूचना मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है… मगर ये स्पष्ट है और ऐसे मज़बूत संकेतक हैं कि किसी ने वहाँ मानव विरोधी बारूदी सुरंगों का प्रयोग किया है. कम से कम छह देशों – अफ़ग़ानिस्तान, कोलम्बिया, भारत, म्याँमार, नाइजीरिया, और पाकिस्तान में ऐसा पाया गया है कि ग़ैर-सरकारी गुटों ने, जून 2020 से लेकर अक्टूबर 2021 तक, संवर्धित बारूदी सुरंगों का इस्तामल किया. सम्पादक ने हालाँकि एक सकारात्मक समाचार ये भी बताया कि लगभग 70 ग़ैर-सरकारी सशस्त्र गुट, अब बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल नहीं करने पर सहमत हुए हैं. ग़ैर-लड़ाकों के लिये भारी क़ीमत ICBL/Jaweed Tanveer अफ़ग़ानिस्तान में बारूदी सुरंगों की चपेट में अपंग हुए मरीज़, कन्दाहार पुनर्वास केन्द्र में, जहाँ उन्हें कोविड-19 के दौरान मदद मुहैया कराई गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि बारूदी सुरंगों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किये जाने का सबसे ज़्यादा असर, आम लोगों को भुगतना पड़ता है और उनकी संख्या हर 10 में से 8 की है. बारूदी सुरंगों की चपेट में आने से जिन लोगों की मौत हुई या जो अपंग हुए, उनमें आधे से ज़्यादा संख्या बच्चों की है. तमाम हताहतों में, 85 प्रतिशत संख्या पुरुषों व लड़कों की है, लेकिन बाद में जब पीड़ितों को सहायता मुहैया कराने का समय आता है तो, महिलाएँ और लड़कियाँ भी प्रभावित होती हैं. भण्डारों को नष्ट करना मॉनीटर के शोधकर्ताओं ने बताया है कि बारूदी सुरंगों की चपेट में आने के कारण हताहत होने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है, मगर इन विस्फोटक सामग्री के भण्डारों को नष्ट करने के मामले में सकारात्मक प्रगति भी हुई है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि वर्ष 1999 के बाद से, 30 से ज़्यादा देशों ने अपने क्षेत्रों में लगीं तमाम बारूदी सुरंगें हटा दी हैं. सबसे हाल ही में ऐसा करने वाले देशों मे चिले और ब्रिटेन शामिल हैं. क़रीब 94 देशीय पक्षों ने अभी तक बताया है कि बारूदी सुरंगों को प्रतिबन्धित करने वाली सन्धि जब वर्ष 1999 में एक अन्तरराष्ट्रीय क़ानून बनी तो, साढ़े पाँच करोड़ से ज़्यादा व्यक्ति विरोधी बारूदी सुरंगों के भण्डार नष्ट किये गए हैं. इनमें, एक लाख 6500 बारूदी सुरंगों का भण्डार, वर्ष 2020 के दौरान ही नष्ट किया जाना शामिल है. इनके अतिरिक्त, श्रीलंका एक ऐसा देश बन गया है जिसने अपने यहाँ बारूदी सुरंगों का पूरा भण्डार नष्ट करने का काम वर्ष 2021 में पूरा किया है. दूषित ज़मीनें मगर चुनौतियाँ अभी बरक़रार हैं क्योंकि कम से कम 60 देश और अन्य क्षेत्र, मानव विरोधी बारूदी सुरंगों की मौजूदगी से दूषित बताए गए हैं. इनमें इस सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले कुल 164 देशों में से, 33 शामिल हैं. लैण्डमाइन मॉनीटर की एक अन्य प्रमुख सम्पादक रूथ बॉटमली का कहना है कि इस सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले अनेक देशीय पक्ष, वर्ष 2025 के अन्त तक, बारूदी सुरंगों के भण्डार पूरी तरह नष्ट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि वैसे तो कोविड-19 सम्बन्धी पाबन्दियों के कारण भी लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में रफ़्तार पर कुछ असर पड़ा है, मगर कुछ देशों में तो कोविड-19 से पहले भी, रफ़्तार धीमी ही चल रही थी. –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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