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सहायक टैक्नॉलॉजी: सर्वाधिक ज़रूरतमन्दों के लिये सुलभता बढ़ाने पर बल

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट बताती है कि विकलांगता की अवस्था में जीवन व्यतीत कर रहे क़रीब एक अरब बच्चों, वयस्कों और वृद्धजन के लिये सहायक टैकनॉलॉजी की आवश्यकता को नकारा जा रहा है. सोमवार को प्रकाशित की गई इस रिपोर्ट में देशों की सरकारों व उद्योग जगत से आग्रह किया गया है कि हालात में बेहतरी लाने के लिये वित्त पोषण पर ध्यान दिया जाना होगा. एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में ढाई अरब लोगों को एक या उससे अधिक प्रकार की सहायक टैक्नॉलॉजी की आवश्यकता है, उदाहरणस्वरूप, व्हीलचेयर, सुनाई देने में सहायक उपकरण या संचार व अनुभूति के लिये ऐप. More than 2.5 billion people - or 1 in 3 people - need one or more assistive products, such as wheelchairs, hearing aids, or apps that support communication and cognition: New WHO & @UNICEF report https://t.co/yMVjdOdREU pic.twitter.com/qpAUegL0K1 — World Health Organization (WHO) (@WHO) May 16, 2022 मगर, विश्व में क़रीब एक अरब लोगों की ऐसे उपायों तक पहुँच नहीं है, और इन उत्पादों की क़ीमत वहन कर पाने की क्षमता का अभाव एक बड़ा अवरोध है. The Global Report on Assistive Technology शीर्षक वाली इस रिपोर्ट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने संयुक्त रूप से तैयार किया है. रिपोर्ट में उन टैक्नॉलॉजी की आवश्यकता व सुलभता के विषय में नए तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है, जिनसे बुनियादी बदलाव ला पाना सम्भव है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि सहायक टैक्नॉलॉजी, जीवन को बदल देने वाली हैं, जिनसे विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे बच्चों व वयस्कों के लिये रोज़गार, शिक्षा व सामाजिक सम्पर्क का दरवाज़ा खुलता है. साथ ही, इससे वृद्धजन के लिये गरिमा के साथ स्वतंत्र रूप से जीवन व्यापन भी सम्भव है. रिपोर्ट बताती है कि सहायक टैक्नॉलॉजी के मामले में उच्च- व निम्न-आय वाले देशों के बीच में एक बड़ी खाई है. 35 देशों का एक विश्लेषण दर्शाता है कि निर्धन देशों में यह केवल तीन फ़ीसदी है, जबकि सम्पन्न देशों में 90 प्रतिशत तक. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने कहा कि दुनिया में क़रीब 24 करोड़ बच्चे विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे हैं. इन सहायक उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले दो-तिहाई लोगों ने बताया कि इनके लिये उन्हें अपनी जेब से ख़र्चा करना पड़ा, जबकि अन्य वित्तीय मदद के लिये अपने मित्रों व परिवारों पर निर्भर रहे हैं. वृद्धावस्था की ओर बढ़ रही दुनिया और ग़ैर-संचारी रोगों के बढ़ते मामलों का अर्थ है कि वर्ष 2050 तक, साढ़े तीन अरब लोगों को सहायक टैक्नॉलॉजी की आवश्यकता होने की सम्भावना है. 70 देशों में कराये गए एक सर्वेक्षण में सेवाओं और कार्यबल प्रशिक्षण के स्तर में सहायक टैक्नॉलॉजी की सेवाओं की बड़ी खाई देखी गई है, विशेष रूप से अनुभूति, संचार व स्व-देखभाल में. इससे पहले के अन्य सर्वेक्षणों में, पहुँच से बाहर क़ीमतें, जागरूकता व सेवा की कमी, अपर्याप्त उत्पाद गुणवत्ता, ख़रीद और सप्लाई चेन चुनौतियाँ जैसे अवरोध सामने आए थे. अनेकानेक लाभ माना जाता है कि सहायक टैक्नॉलॉजी उत्पादों के ज़रिये, अन्य लोगों की तरह जीवन सामान्य ढँग से गुज़ारने में मदद मिलती है. इनके अभाव में, लोगों के लिये अलग-थलग पड़ जाने, निर्धनता व भुखमरी का शिकार होने, बहिष्करण की पीड़ा झेलने, और परिवार, समुदाय, व सरकार के समर्थन पर निर्भरता बढ़ती है. इन टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ, परिवारों व समाजों को भी उनका लाभ मिलता है. गुणवत्तापरक, सुरक्षित व पहुँच के भीतर सहायक उत्पादों की सुलभता बढ़ाकर, स्वास्थ्य व कल्याण क़ीमतों में कमी लाने में भी मदद मिलती है, और ज़्यादा उत्पादक श्रमबल को बढ़ावा मिलता है. © UNICEF/Ziyah Gafic कोसोवो में एक पिता सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित अपने बच्चे की मदद कर रहे हैं. विकलांग बच्चों के लिये सहायक टैक्नॉलॉजी अक्सर उनके विकास, शिक्षा सुलभता, खेलकूद व नागरिक जीवन में भागीदारी और रोज़गार के लिये तैयार होने का पहला क़दम होती है. हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ, उन्हें कुछ अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसेकि बार-बार ज़रूरत के अनुरूप बदलने की मजबूरी. बेहतर सुलभता रिपोर्ट में सहायक टैक्नॉलॉजी की उपलब्धता व सुलभता बढ़ाने, जागरूकता प्रसार और समावेशी नीतियाँ लागू किये जाने के लिये सिलसिलेवार अनुशन्साएँ भी प्रस्तुत की गई हैं, ताकि लाखों लोगों के जीवन में बेहतरी लाई जा सके. इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक देखभाल प्रणालियों के तहत सुलभता को बेहतर बनाने, उपलब्धता, प्रभावीपन व किफ़ायतीपन सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता रेखांकित की गई है. साथ ही कार्यबल क्षमता में विस्तार, उसे वैविध्यपूर्ण व बेहतर बनाना; शोध, नवाचार व सामर्थ्यवान पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश पर बल दिया गया है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने देशों का आहवान किया है कि सहायक टैक्नॉलॉजी की सुलभता को प्राथमिकता देते हुए वित्त पोषण प्रदान किया जाना होगा. और हर किसी के लिये सम्भावनाओं के अनुरूप जीवन जीने का अवसर सुनिश्चित किया जाना होगा. --संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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